संवाद सूत्र, राजगढ़ : प्रदेश में पंचायत सचिव, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की तरह कोरोना महामारी से निपटने के लिए दिन-रात सेवाएं दे रहे हैं। ड्यूटी देते हुए पंचायत सचिवों को भी कोरोना हो सकता है। पंचायती राज अधिकारी एवं कर्मचारी संघ सिरमौर के अध्यक्ष विक्रम ठाकुर ने जिला परिषद काडर के पंचायत सचिवों ने प्रदेश सरकार के समक्ष अपनी मांग रखी है। कहा गया है कि पंचायत सचिव को भी कोरोना योद्धाओं में शमिल किया कर उनका 50 लाख रुपये का बीमा करवाया जाए।

विक्रम ठाकुर ने बताया कि पंचायत सचिव प्रवासी श्रमिक के रहने, खाने-पीने, पंचायत क्षेत्र में कौन आया कौन गया, इस का पूरा लेख जोखा तैयार कर प्रशासन को तुरंत सूचनाएं दे रहे हैं। काम लेने के लिए सचिवों को ग्रामीण विकास का कर्मचारी बताया जा रहा है और कोरोना योद्धा भी घोषित किया गया है। मगर पुलिस व स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की तरह 50 लाख बीमा के तहत सुरक्षा प्रदान नहीं की गई। कोरोना महामारी में कार्य करते हुए सचिव भी संक्रमित हो सकते हैं। सचिव और सचिव के परिवार को बीमा से सुरक्षित किया जाना भी अनिवार्य है। पंचायत सचिवों में सरकार के खिलाफ रोष है कि प्रदेश सरकार दोहरे मापदंड अपना रही है। वेतन काटने के लिए हमें सरकारी कर्मचारी बताया जा रहा है और यदि सचिव विभाग में खाली पदों पर लेने की व विलय की मांग करें, तो संस्थागत कर्मचारी बताया जाता है। 2015 में नियमित होने के बावजूद अभी तक कर्मचारी कोड जारी नहीं किया जाना इसका सबूत है।

Posted By: Jagran

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