यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 05, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
एनजीटी के आदेश के खिलाफ अपील करेगी प्रदेश सरकार
सभी अधिकारी इस बात के लिए एक मत थे कि एनजीटी ने जो निर्णय दिया है कि वह जनता के हित में नहीं है।

शिमला, राज्य ब्यूरो। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के खिलाफ प्रदेश सरकार अपील दायर करेगी। अपील उच्चतम न्यायालय में दायर की जानी है या कहीं और इस संबंध में सभी तथ्यों का बारीकी से अध्ययन करने के निर्देश विधि सचिव को दिए गए हैं।
मुख्य सचिव वीसी फारका की अध्यक्षता में एनजीटी के आदेश के संबंध में बैठक हुई। इसमें एनजीटी की ओर से हाल में दिए गए निर्णय जिसमें अढ़ाई मंजिल तक भवन निर्माण और पहले के बने मकानों की मंजूरी के लिए लाखों रुपये के जुर्माने के प्रावधान पर चर्चा हुई। प्रदेश सचिवालय में हुई इस बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव शहरी आवास, नगर एवं ग्राम योजना विभाग के निदेशक, नगर निगम और संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भी भाग लिया। सभी अधिकारी इस बात के लिए एक मत थे कि एनजीटी ने जो निर्णय दिया है कि वह जनता के हित में नहीं है। इससे हजारों लोग प्रभावित होंगे और विकास कार्य भी आखिर कैसे होंगे।
अवैध भवनों को नियमित करने पर सख्ती और अढ़ाई मंजिल से ऊंचे भवन बनाने पर रोक से संबंधित आदेश के बाद भवन मालिकों में बेचैनी है। जन कल्याण समन्वय समीति और शिमला नागरिक सभा ने तो आंदोलन की चेतावनी तक दे डाली है।
एनजीटी के आदेश के मुख्य बिंदु
-अढ़ाई मंजिल से अधिक के निर्माण पर रोक।
-अनियमित भवनों को नियमित करने के लिए 5-10 हजार रुपये प्रति वर्गफुट जुर्माना राशि।
-जर्जर भवनों के स्थान पर नए भवन भी अढ़ाई मंजिल तक के ही बनेंगे।
एनजीटी के भवन
निर्माण और भवनों को नियमित करने के लिए दिए गए आदेश पर बैठक आयोजित की गई। इसमें विधि सचिव को अपील दायर करने के संबंध में सभी तथ्यों का अध्यन करने को कहा गया है। इस संबंध में बारीकी से अध्ययन किया जाएगा।
-वीसी फारका, मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश।
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