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पहाड़ों को चीर कर निकली राह, धीमी गति वाले हिमाचल प्रदेश की ऐसे बढ़ी स्पीड

कीरतपुर-मनाली फोरलेन से लोगों की यात्रा सुगम और सुरक्षित होने वाली है। पहाड़ों को चीरकर बनाई गई पांच सुरंगों के कारण लोग भूस्खलन के खतरे से मुक्त होंगे और मनाली पहुंचने में समय भी कम लगेगा। संभवत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसे अगले माह जनता को समर्पित कर देंगे।

By Jagran NewsEdited By: Gurpreet CheemaPublished: Fri, 26 May 2023 11:16 AM (IST)Updated: Fri, 26 May 2023 11:16 AM (IST)
पहाड़ों को चीर कर निकली राह, धीमी गति वाले हिमाचल प्रदेश की ऐसे बढ़ी स्पीड
कीरतपुर-मनाली फोरलेन से लोगों की यात्रा सुगम और सुरक्षित होने वाली है।

शिमला, नीरज आजाद। धीमी गति के यातायात के लिए जाने जाते हिमाचल प्रदेश की दशा और दिशा बदलने लगी है। पहाड़ों को चीर और घाटियों को जोड़कर फोरलेन सड़कें बनने लगी हैं। कीरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना आकार ले रही है। मंडी से मनाली जाते समय ऐसे दृश्य आम थे कि क्षेत्र में पहाड़ी से पत्थर गिर रहे हैं, मलबा गिरने से सड़क को बंद किया जा रहा है आदि।

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बरसात में ऐसे दृश्य भी आम थे कि रौद्र रूप धारण किए ब्यास नदी का पानी सड़क पर आ जाता और घंटों तक लोगों को वाहनों में ही पानी उतरने का इंतजार करना पड़ता। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

कीरतपुर-मनाली फोरलेन से लोगों की यात्रा होगी सुगम

कीरतपुर-मनाली फोरलेन से लोगों की यात्रा सुगम और सुरक्षित होने वाली है। पहाड़ों को चीरकर बनाई गई पांच सुरंगों के कारण लोग भूस्खलन के खतरे से मुक्त होंगे और मनाली पहुंचने में समय भी कम लगेगा। नागचला से मनाली के बीच बनने वाली 14 सुरंगों में से पांच का कार्य पूर्ण हो चुका है और इनका ट्रायल भी सफल रहा है।

चंडीगढ़ से मनाली तक रोमांच भरा सफर

संभवत: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसे अगले माह जनता को समर्पित कर देंगे। फोरलेन का कार्य पूरा होने के बाद चंडीगढ़ से मनाली तक का रास्ता रोमांच से भरा होगा। सड़क के किनारे पर्यटकों की सुविधा के लिए पर्यटन निगम रेस्टोरेंट भी बनाने जा रहा है। सब जानते हैं कि हिमाचल प्रदेश में सड़कों का जाल बिछा है, लेकिन सर्पीली सड़कें हर मोड़ पर वाहन चालकों की परीक्षा लेती हैं। जरा सी चूक दुर्घटना का कारण बन सकती है। सड़कों को भाग्यरेखाएं भी माना जाता है, लेकिन हिमाचल की भाग्यरेखाओं पर कई अवरोध रहे हैं। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी रही है या अन्य कारण। सड़कों का जाल तो अवश्य बिछा, लेकिन वाहनों की गति नहीं बढ़ पाई।

सिर्फ 190 किमी में दूरी होगी तय

यह अलग बात है कि अंग्रेजी शासन के दौरान पहाड़ों को काटकर सुरंगें भी बनीं और पुल भी व मंडी के जोगेंद्रनगर और कालका से शिमला तक रेललाइन बिछाई गई। इन पर रेलगाड़ी भी चलती है, परंतु उसके बाद इनका विस्तार एक इंच भी नहीं हो पाया। प्रदेश में हवाई सेवा भी सीमित है।

हिम के आंचल को प्रकृति ने खूब संवारा है, परंतु पर्यटन प्रदेश की आर्थिकी का प्रमुख साधन नहीं बन पाया। बहरहाल, फोरलेन बनने से न केवल दूरी कम होगी, बल्कि पर्यटकों को सफर में भी कम समय बिताना पड़ेगा। अभी चंडीगढ़ से मनाली की दूरी 247 किमी है, जो फोरलेन बनने से 190 किमी रह जाएगी। आठ घंटे की यात्रा अब छह घंटे में पूरी होगी। 4100 करोड़ रुपये की परियोजना से दिल्ली और चंडीगढ़ से मनाली और लेह-लद्दाख आने वाले पर्यटकों के अलावा स्थानीय लोगों को भी इससे बड़ा लाभ होगा।

लाहुल-स्पीति उत्पाद आसानी से बाजारों तक पहुंचेंगे

अटल टनल बनने से जहां जनजातीय जिले लाहुल-स्पीति के लोगों को मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिला था, अब फोरलेन बनने से उनके उत्पादों को देश-दुनिया के बाजारों तक पहुंचाना मुश्किल नहीं होगा। सामरिक दृष्टि से भी फोरलेन अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।

चीन सीमा से सटे क्षेत्रों तक समय रहते रसद पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। आम तौर पर फोरलेन पर वाहन फर्राटे भरते हैं और 100 किमी प्रति घंटा से भी तेज वाहन दौड़ते हैं, परंतु इस फोरलेन पर वाहनों की गति नियंत्रित रखनी होगी। यहां वाहन की गति 40 से 60 किमी तय होगी। कुछ स्थानों पर 80 किमी प्रति घंटे की गति से भी वाहन चलाए जा सकते हैं। वाहनों चालकों को सतर्क करने के लिए जगह-जगह गति से संबंधित संकेतक भी लगाए जा रहे हैं।

फोरलेन पर लगाए गए हैं विशेष कैमरे

नियमों की अवहेलना न हो, इसके लिए हर किमी पर विशेष कैमरे भी लगाए जाएंगे। गति से संबंधित नियम तोड़ने वालों के स्वत: चालान भी हो जाएंगे। राज्य में अन्य फोरलेन भी प्रस्तावित हैं। शिमला-कांगड़ा और पठानकोट-मंडी फोरलेन का कार्य भी तेजी से चल रहा है।

इन फोरलेन के निर्माण से लोगों के समय की बचत होगी और पर्यटन उद्योग भी तेजी पकड़ेगा एवं राज्य की आर्थिकी का प्रमुख साधन बनेगा। फोरलेन के निर्माण के साथ ही राज्य में रेल विस्तार की संभावनाओं को भी बल मिलेगा। भानुपल्ली-बिलासपुर रेललाइन निर्माण के बाद इसे लेह तक पहुंचाने और पठानकोट-जोगेंद्रनगर रेललाइन का विस्तार कर इसे मंडी तक पहुंचाने की दिशा में भी काम होगा। सामरिक दृष्टि से भी ये रेलमार्ग महत्वपूर्ण हैं।


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