'ग्रीनफील्ड' होगा शालाघाट-शिमला फोरलेन, 56 KM कम होगी कांगड़ा की दूरी; सर्वे रिपोर्ट के बाद होगा भूमि अधिग्रहण
हिमाचल प्रदेश में मटौर-शिमला फोरलेन के शालाघाट से शिमला तक के हिस्से को अब 'ग्रीनफील्ड' बनाया जाएगा, जिससे यह दूरी 33 से घटकर 25 किलोमीटर रह जाएगी।

शिमला से शालाघाट फोरलेन का ग्रीनफील्ड निर्माण होगा। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
शालाघाट-शिमला फोरलेन अब 'ग्रीनफील्ड' स्वरूप में बनेगा।
कांगड़ा से शिमला की कुल दूरी 56 किलोमीटर कम होगी।
नए अलाइनमेंट में 5 सुरंगें बनेंगी, सफर निर्बाध और रोमांचक।
प्रकाश भारद्वाज, शिमला। हिमाचल प्रदेश के सबसे महत्वाकांक्षी मटौर-शिमला फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत शालाघाट से शिमला तक के हिस्से को अब 'ग्रीनफील्ड' (बिल्कुल नए सिरे से निर्माण) का स्वरूप दिया जाएगा। इस नए अलाइनमेंट के बनने से शालाघाट और शिमला के बीच की दूरी 33 किलोमीटर से घटकर महज 25 किलोमीटर रह जाएगी। इस सफर को निर्बाध और रोमांचक बनाने के लिए पहाड़ों के बीच में 5 नई सुरंग (टनल) भी बनाई जाएंगी।
सर्वे का काम तेज
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने इसके अलाइनमेंट सर्वे का काम तेज कर दिया है। एनएचएआई ने इस महत्वपूर्ण अलाइनमेंट की रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा कास्टा इंजीनियरिंग कंपनी को सौंपा है। कंपनी को दिसंबर महीने तक अपनी विस्तृत तकनीकी सर्वे रिपोर्ट एनएचएआई को सौंपनी है।
इसके बाद प्रस्तावित क्षेत्र का खाका प्रदेश सरकार के समक्ष रखा जाएगा। राज्य सरकार से हरी झंडी मिलते ही जमीन अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया जाएगा।
जुब्बड़हट्टी से गुजरेगा हाईवे, 56 किमी घटेगी कांगड़ा की दूरी
प्रस्तावित अलाइनमेंट के अनुसार,यह नया और आधुनिक फोरलेन जुब्बड़हट्टी हवाई अड्डे के समीप से होकर गुजरेगा और सीधा तारादेवी के पास जाकर जुड़ेगा। इससे न सिर्फ सफर के समय और ईंधन में भारी बचत होगी। पूरे मटौर-शिमला फोरलेन (लगभग 223 किलोमीटर) कांगड़ा से शिमला के बीच की कुल दूरी में करीब 56 किलोमीटर की बड़ी कमी आएगी।
आखिर क्यों लिया गया ग्रीनफील्ड का फैसला
इससे पहले इस फोरलेन को पुराने रूट यानी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, घणाहट्टी और टुटू होते हुए गुजारने की योजना थी। लेकिन, इस पुराने हाईवे पर घनी आबादी होने के कारण भारी संख्या में मकानों और दुकानों की तोड़फोड़ का खतरा था। इसके अलावा सर्दियों में नाल्टू, जतोग और बालूगंज जैसे क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के कारण यह मार्ग अक्सर बंद हो जाता था।
इन तमाम अड़चनों को देखते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस हाईवे को मौजूदा सड़क से बिल्कुल अलग (ग्रीनफील्ड) बनाने का ऐतिहासिक फैसला लिया। इससे रिहायशी इलाकों को नुकसान नहीं पहुंचेगा और बर्फबारी के दौरान भी ट्रैफिक बिना रुके दौड़ सकेगा।
