मनाली फोरलेन पर दयोड़ व हणोगी के बाद अब NHAI का अगला टारगेट दवाड़ा फ्लाईओवर और झलोगी टनल, पूरा प्लान तैयार
दयोड़ और हणोगी सुरंगों के खुलने के बाद, एनएचएआई अब कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर दवाड़ा फ्लाईओवर और झलोगी सुरंग के जीर्णोद्धार पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

मनाली हाईवे पर दवाड़ा में क्षतिग्रस्त फ्लाईओवर। जागरण आर्काइव
HighLights
एनएचएआई का अगला लक्ष्य दवाड़ा फ्लाईओवर और झलोगी सुरंग का जीर्णोद्धार।
प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त दवाड़ा फ्लाईओवर के पिलर नए सिरे से बनेंगे।
झलोगी सुरंग का पोर्टल नए स्थान पर, 150 मीटर लंबाई बढ़ेगी।
जागरण संवाददाता, मंडी। कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर दयोड़ व हणोगी सुरंग के शुरू होने के बाद अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने अपना पूरा ध्यान दवाड़ा फ्लाईओवर और झलोगी सुरंग के जीर्णोद्धार पर केंद्रित कर दिया है। वर्ष 2025 की प्राकृतिक आपदा के दौरान पहाड़ से भारी चट्टानें और मलबा गिरने के कारण दवाड़ा फ्लाईओवर के पिलर व स्लैब तथा झलोगी सुरंग का पोर्टल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। इससे वाहनों की आवाजाही रोकना पड़ी थी।
तकनीकी विशेषज्ञों की जांच के बाद एनएचएआई ने फैसला लिया है कि दवाड़ा फ्लाईओवर के चार स्लैब हटाने के साथ-साथ अब इसके क्षतिग्रस्त तीन पिलरों को भी पूरी तरह से गिराकर नए सिरे से बनाया जाएगा। सुरक्षा और स्थायित्व को ध्यान में रखते हुए यह कदम बेहद आवश्यक माना जा रहा है।
झलोगी टनल पर जल्द होगा निर्णय
इसके साथ ही झलोगी सुरंग के क्षतिग्रस्त पोर्टल के पुनर्निर्माण को लेकर भी जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा, ताकि इस पैच पर यातायात को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके। झलोगी सुरंग का पोर्टल वर्तमान के बजाय नए स्थान पर बनाया जाएगा। इसके लिए सुरंग की लंबाई करीब 150 मीटर और बढ़ाई जाएगी। एनएचएआइ इस पर जल्द निर्णय लेगा।
...तो पूरी क्षमता के साथ बहाल होगा फोरलेन
दयोड़ और हणोगी सुरंगों के खुल जाने से कुल्लू-मनाली की ओर जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को काफी राहत मिली है। अब दवाड़ा फ्लाईओवर और झलोगी सुरंग का मरम्मत कार्य पूरा होते ही फोरलेन का यह हिस्सा पूरी क्षमता के साथ बहाल हो जाएगा। फिलहाल यहां एकतरफा यातायात चल रहा है।
दयोड़ और हणोगी सुरंगों को सुचारू रूप से शुरू कर दिया गया है। अब प्राथमिकता दवाड़ा फ्लाईओवर और झलोगी सुरंग के पुनर्निर्माण को तेजी से पूरा करने की है। फ्लाईओवर के क्षतिग्रस्त पिलरों को हटाकर उनका निर्माण नए सिरे से किया जाएगा, ताकि मार्ग पर स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
-वरुण चारी, परियोजना निदेशक, एनएचएआई, मंडी।
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