शिमला: 'समिट्री के नीचे टनल नहीं बनने देंगे, पुरानी एलाइनमेंट पर काम करे NHAI', सांसद के सामने फूटा जनआक्रोश
सांसद सुरेश कश्यप की मौजूदगी में संजौली के लोगों ने फोरलेन सुरंग निर्माण का विरोध किया, पुरानी एलाइनमेंट पर काम करने की मांग की।

शिमला के संजौली में लोगों से संवाद करते सांसद सुरेश कश्यप। जागरण
HighLights
संजौली में लोग पुरानी एलाइनमेंट पर फोरलेन चाहते हैं, सुरंग का विरोध।
सुरक्षा, भूगर्भीय जांच और जनसुनवाई न होने पर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं।
सांसद सुरेश कश्यप ने उच्च अधिकारियों के समक्ष मामला उठाने का आश्वासन दिया।
जागरण संवाददाता, शिमला। जिला शिमला के संजौली में फोरलेन निर्माण को लेकर चल रहे विवाद के बीच वीरवार को शांति विहार स्थित सामुदायिक भवन में सांसद सुरेश कश्यप की मौजूदगी में बैठक हुई। लोगों ने उनके सामने फोरलेन निर्माता कंपनी व एनएचएआई के खिलाफ गुस्सा निकाला। बैठक में उपस्थित एनएचएआई के अधिकारियों के समक्ष लोगों ने कहा कि समिट्री के नीचे से सुरंग नहीं बनने देंगे। उन्होंने पुरानी एलाइनमेंट के आधार पर ही फोरलेन का निर्माण करने की मांग की।
जियो-टेक्निकल और सुरक्षा मूल्यांकन आवश्यक
लोगों ने कहा कि पुराने सर्वे, वर्तमान एलाइनमेंट और निर्माण की तकनीकी प्रक्रिया की विस्तृत जांच की जाए और पूरी स्थिति लोगों के सामने स्पष्ट की जाए। क्षेत्र की भौगोलिक और भूगर्भीय संवेदनशीलता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बड़े स्तर की परियोजना पर आगे बढ़ने से पहले विस्तृत जियो-टेक्निकल और सुरक्षा मूल्यांकन बेहद आवश्यक है।
लोगों को विश्वास में नहीं लिया गया
लोगों ने आरोप लगाया कि परियोजना शुरू करने से पहले प्रभावित क्षेत्र में व्यापक जनसुनवाई नहीं हुई और सभी हितधारकों तथा जनप्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया गया। वर्तमान एवं पूर्व पार्षदों के साथ भी संवाद नहीं किया गया।
आवासीय भवनों पर असर
टनल निर्माण का असर बड़ी संख्या में आवासीय भवनों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में ढलान अत्यधिक है और किसी एक भवन अथवा भू-भाग में अस्थिरता आने की स्थिति में आसपास के अन्य भवनों पर भी प्रभाव पड़ने का खतरा हो सकता है। शांति विहार में भवनों में दरारें आने की शिकायतें पहले भी सामने आई हैं।
प्रशासन ने सितंबर में टनल निर्माण से संबंधित कार्य को रोकते हुए आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञों से वैज्ञानिक एवं तकनीकी आकलन कराने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि तकनीकी रिपोर्ट के बाद ही सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर आगे काम बढ़ाया जाए।
घर और टनल की दूरी पर भी जताई चिंता
लोगों ने टनल और आवासीय भवनों के बीच दूरी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। कुछ स्थानों पर टनल आवासीय भवनों के बेहद करीब से गुजर रही है। उन्होंने इसकी स्वतंत्र तकनीकी जांच करवाने की मांग की। लक्ष्मीनारायण मंदिर सहित क्षेत्र के धार्मिक एवं सामाजिक महत्व वाले स्थानों की सुरक्षा का विषय भी उठाया और कहा कि लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़े स्थलों पर परियोजना के संभावित प्रभाव का भी आकलन किया जाना चाहिए। जिन भवनों और भूमि का अधिग्रहण किया गया है तथा जिन परिवारों को नुकसान हुआ है, उनके मामलों में पारदर्शिता और उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।
उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा मामला : सुरेश
सुरेश कश्यप ने प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया कि वह मामले को उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाएंगे। सुरेश कश्यप ने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन विकास से भी ज्यादा महत्वपूर्ण लोगों की जान और जिंदगी है। इस विषय को लेकर प्रोजेक्ट डायरेक्टर और शिमला के उपायुक्त से भी बात की है। क्षेत्र का जायजा लेने के बाद कहा कि स्थानीय लोगों में जो डर और आशंका है, उसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए कि आने वाले समय में संजौली में किसी प्रकार की त्रासदी की स्थिति पैदा न हो।
