भानुपल्ली-बिलासपुर ब्रॉडगेज रेललाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचनाएं रद, हिमाचल हाई कोर्ट का आदेश
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी ब्रॉडगेज रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की समयसीमा बढ़ाने वाली सरकारी अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया है।

बिलासपुर में बिछाई जा रही ब्रॉडगेज रेलवे लाइन। जागरण आर्काइव
HighLights
हिमाचल हाई कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण अधिसूचनाएं रद्द कीं।
सरकार ने बिना कारण समयसीमा तीन बार बढ़ाई थी।
किसानों की उपजाऊ भूमि पर विकास कार्य रुके थे।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी ब्रॉडगेज रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले में राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहण की समयसीमा बढ़ाए जाने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार बिना किसी ठोस लिखित कारण के अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना को बार-बार नहीं बढ़ा सकती।
न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने कुलदीप ठाकुर व अन्य द्वारा दायर रिट याचिका को स्वीकार करते हुए सरकार की अधिसूचनाओं को अवैध करार देकर रद कर दिया है।
बिलासपुर के इन गांवों की भूमि पर पेंच
यह मामला बिलासपुर जिले की सदर तहसील के तहत आने वाले गांवों उपरी भटेर, बरमाणा और खतेर से जुड़ा है। इन गांवों के किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि और मकानों को भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी ब्रॉडगेज रेलवे लाइन के निर्माण के लिए अधिगृहीत किया जा रहा था।
तीन बार बढ़ाई समय सीमा
सरकार ने भूमि अधिग्रहण, कानून के तहत 29 मार्च 2023 को प्रारंभिक अधिसूचना जारी की थी। कानून के अनुसार, इसके 12 महीने के भीतर अंतिम घोषणा होनी अनिवार्य थी। अंतिम घोषणा करने में नाकाम रही सरकार ने तीन बार (16 मार्च 2024, 24 मार्च 2025 और 25 मार्च 2026) इसकी समय सीमा बढ़ा दी। अधिसूचनाओं में देरी का कारण केवल "अपरिहार्य प्रशासनिक परिस्थितियां" बताया था।
फाइलों में भी देरी का ब्योरा दर्ज नहीं
हाई कोर्ट के आदेश पर जब अदालत में सरकारी फाइलें पेश की गईं तो सरकार ने यह स्वीकार किया कि फाइलों में भी देरी का कोई वास्तविक कारण या ब्योरा दर्ज नहीं था। अदालत ने अधिनियम की धारा 19(7) के तीसरे प्रविधान का हवाला देते हुए कहा कि समयसीमा बढ़ाने के फैसले के पीछे के कारणों को लिखित रूप में दर्ज करना, अधिसूचित करना और संबंधित विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य नियम है।
किसान नहीं कर पा रहे थे कोई कार्य
कोर्ट ने कहा कि कारण बताए बिना केवल प्रशासनिक परिस्थितियों का हवाला देना बहाना मात्र है और इसे कानूनन स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार की इस लापरवाही के कारण किसान अपनी ही जमीन पर कोई नया विकास कार्य नहीं कर पा रहे थे। अदालत ने 29 मार्च 2023 की प्रारंभिक अधिसूचना और समय बढ़ाने वाली तीनों अधिसूचनाओं को कानूनन गलत ठहराते हुए रद कर दिया है।
