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हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र में रेत-बजरी के लिए लीज प्रक्रिया होगी आसान, SDM की अध्यक्षता वाली कमेटी देगी अनुमति

By Parkash Bhardwaj Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 01 Oct 2026 06:42 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में रेत-बजरी के लिए लीज प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा। एसडीएम की अध्यक्षता ...और पढ़ें

हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र में रेत-बजरी निकालने के लिए लीज प्रक्रिया आसान होगी। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र में रेत-बजरी निकालने के लिए लीज प्रक्रिया आसान होगी। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. जनजातीय क्षेत्रों में रेत-बजरी लीज प्रक्रिया होगी आसान।

  2. एसडीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी देगी लीज की अनुमति।

  3. अवैध खनन पर रोक, निर्माण कार्यों में आएगी तेजी।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में अब रेत-बजरी के लिए लीज प्रकिया आसान होने वाली है। अभी लाहुल स्पीति, किन्नौर, पांगी-भरमौर और डोडरा-क्वार में घर बनाना लोगों के लिए मुश्किल है। रेत-बजरी निकालने के लिए मौजूदा नियमों के तहत लीज के साथ क्रशर लगाना अनिवार्य है। कम आबादी और सीमित मांग वाले इन क्षेत्रों में क्रशर लगाना व्यावसायिक रूप से संभव नहीं होने के कारण लोग कई बार मजबूरी में नदियों से अवैध रूप से रेत-बजरी निकालते हैं और पकड़े जाने पर जुर्माना भरते हैं।

एसडीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी देगी अनुमति

इस समस्या को देखते हुए उद्योग विभाग के माइनिंग विंग ने नियमों में संशोधन का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। प्रस्ताव के अनुसार जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में भूमि लीज का अधिकार एसडीएम की अध्यक्षता वाली जिलास्तरीय कमेटी को दिया जाएगा। अभी इसके लिए शिमला से अनुमति लेनी पड़ती है, जिसमें महीनों लग जाते हैं। साथ ही क्रशर लगाने की अनिवार्य शर्त में भी ढील देने का प्रस्ताव है।

प्रस्ताव सचिवालय भेजा

प्रस्ताव में छोटे नालों और खड्डों से सीमित मात्रा में रेत-बजरी निकालने के लिए परमिट व्यवस्था लागू करने की बात है। स्थानीय लोगों, पंचायतों और सरकारी निर्माण कार्यों के लिए अलग कोटा तय किया जाएगा। विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर सचिवालय भेज दिया है और इसे कैबिनेट की अगली बैठक में मंजूरी मिलने की संभावना है।

लाहुल में 35-40 हजार, मंडी में 8-10 हजार रुपये ट्रक

प्रदेश सरकार ने पौंग-भाखड़ा बांध और बड़ी नदियों में बड़े ठेकेदारों को ड्रेजिंग का जिम्मा देने की योजना बनाई है, लेकिन जनजातीय क्षेत्रों में बड़े ठेकेदार काम करने में रुचि नहीं दिखाते। इसका असर निर्माण सामग्री की कीमतों पर भी है। लाहुल में एक ट्रक रेत-बजरी 35-40 हजार रुपये में मिल रही है, जबकि मंडी में यही सामग्री 8-10 हजार रुपये में उपलब्ध है।

उद्योग मंत्री भी मान चुके मौजूदा लीज नीति व्यावहारिक नहीं

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान भी मान चुके हैं कि दुर्गम क्षेत्रों में मौजूदा लीज नीति व्यावहारिक नहीं है। विभाग के अनुसार प्रस्तावित बदलाव से अवैध खनन पर रोक लगाने के साथ मनरेगा, पीएम आवास और बार्डर रोड के निर्माण कार्यों में तेजी आ सकती है। सरकार को रायल्टी मिलने का रास्ता भी साफ होगा।

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