11 साल के बच्चे को छोटे जबड़े के कारण सांस लेने में हो रही थी मुश्किल, शिमला में बिना बोन ग्राफ्ट किया सफल उपचार
शिमला के सरकारी दंत महाविद्यालय में 11 वर्षीय बच्चे के जन्मजात छोटे जबड़े की सफल सर्जरी की गई। आधुनिक मैंडिबुलर ...और पढ़ें

शिमला में 11 साल के बच्चे के छोटे जबड़े की सफल सर्जरी की गई।
HighLights
शिमला में 11 वर्षीय बच्चे के छोटे जबड़े की जटिल सर्जरी।
आधुनिक एमडीओ तकनीक से बिना बोन ग्राफ्ट सफल उपचार।
सांस लेने की समस्या और स्लीप एपनिया से मिली राहत।
जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकारी दंत महाविद्यालय एवं अस्पताल शिमला के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग ने 11 साल के बच्चे के छोटे निचले जबड़े की जटिल सर्जरी की है। मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभागाध्यक्ष और उनकी टीम ने आधुनिक मैंडिबुलर डिस्ट्रैक्शन आस्टियोजेनेसिस (एमडीओ) तकनीक के माध्यम से बच्चे के निचले जबड़े का आकार धीरे-धीरे बढ़ाकर उसका सफल उपचार किया।
जीभ पीछे की ओर जाने से सांस लेने में थी दिक्कत
बच्चे का निचला जबड़ा जन्मजात छोटा था, जिस कारण उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी। जांच में आब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया की समस्या भी सामने आई थी। जबड़ा छोटा होने के कारण जीभ पीछे की ओर जाने से सांस की नली में रुकावट हो रही थी। इससे सोते समय उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी होती थी।
किस तरह किया उपचार
स्थिति को देखते हुए विभाग की टीम ने एमडीओ तकनीक से जबड़े को आगे और लंबा करने का निर्णय लिया। सर्जरी के दौरान निचले जबड़े की हड्डी को निर्धारित स्थान पर काटकर वहां विशेष डिस्ट्रैक्टर उपकरण लगाया। ऑपरेशन के बाद करीब तीन से पांच दिन तक उपकरण को स्थिर रखा, ताकि हड्डी के कटे हिस्सों के बीच शुरुआती नया ऊतक बन सके।
इसके बाद डिस्ट्रैक्टर को प्रतिदिन लगभग एक मिलीमीटर की दर से धीरे-धीरे सक्रिय किया। इससे हड्डी के दोनों हिस्सों के बीच अंतर बढ़ा और उस स्थान पर शरीर ने नई हड्डी बनाना शुरू की।
...तो रोक दिया खिंचाव
चिकित्सकों के अनुसार, जब जबड़ा आवश्यक लंबाई तक पहुंच गया तो खिंचाव रोक दिया। नई बनी हड्डी को मजबूत होने के लिए डिस्ट्रैक्टर को करीब दो से तीन महीने तक लगाए रखा। हड्डी के मजबूत होने के बाद छोटी सर्जरी से उपकरण को बाहर निकाल दिया। इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें शरीर के किसी दूसरे हिस्से, जैसे कूल्हे से हड्डी निकालकर बोन ग्राफ्ट लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। जबड़े की हड्डी के साथ आसपास के कोमल ऊतक, त्वचा और मांसपेशियां भी धीरे-धीरे खिंचकर विकसित होती हैं।
यह होती है एमडीओ तकनीक
एमडीओ निचले जबड़े की हड्डी को धीरे-धीरे लंबा करने और बढ़ाने की एक अत्याधुनिक सर्जिकल तकनीक है। इस तकनीक का उपयोग मुख्य रूप से उन नवजात शिशुओं या बच्चों के इलाज के लिए किया जाता है जिनका निचला जबड़ा जन्मजात रूप से बहुत छोटा होता है। छोटा जबड़ा होने के कारण बच्चे की जीभ पीछे गिर जाती है और सांस लेने का रास्ता बंद हो जाता है, जिससे गंभीर सांस संकट पैदा हो जाता है। एमडीओ तकनीक जबड़े का आकार बढ़ाकर सांस लेने की जगह बनाती है।
