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शिमला शहर में अंधाधुंध पहाड़ काटने पर हाई कोर्ट का हिमाचल सरकार और नगर निगम को नोटिस, जवाब तलब किया

By Rohit Nagpal Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 03 Sep 2026 03:45 PM (IST)Updated: Thu, 03 Sep 2026 04:04 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला के टॉलैंड में नगर निगम द्वारा की जा रही वर्टिकल हिल कटिंग पर कड़ा ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने शिमला में वर्टिकल हिल कटिंग पर नोटिस जारी किया।

  2. पेड़ों के गिरने, अवैध कटाई और नाला अवरुद्ध होने का आरोप।

  3. अदालत ने विस्तृत जांच और रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के टॉलैंड क्षेत्र में नगर निगम की ओर से की जा रही वर्टिकल हिल कटिंग (खड़ी ढलान काटना) को लेकर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है और जमीनी स्तर पर जांच के आदेश दिए हैं। 

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश चिराग भानु सिंह की खंडपीठ ने उमा महाजन द्वारा दायर जनहित याचिका पर जारी किया। 

कटिंग से पेड़ों के गिरने का खतरा

याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष टॉलैंड क्षेत्र की कुछ पुरानी और वर्तमान तस्वीरें पेश कीं। अदालत को बताया गया कि नगर निगम की ओर से बिना सोचे-समझे की जा रही वर्टिकल कटिंग के कारण पहाड़ी के ऊपरी हिस्से पर मौजूद पेड़ों के गिरने और नष्ट होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। 

बिना अनुमति काटे देवदार के पेड़

इसके अलावा, याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि इस क्षेत्र से हरे देवदार के पेड़ों को अवैध रूप से हटाया गया है और इसके लिए उचित अनुमति भी नहीं ली गई थी। 

इमारत निर्माण से अवरुद्ध हो सकता है नाला

सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि सड़क के एक तीखे मोड़ पर एक इमारत का निर्माण किया जा रहा है, जिसे कम्युनिटी सेंटर बताया जा रहा है। इस निर्माण कार्य के कारण वहां स्थित एक प्राकृतिक नाला पूरी तरह अवरुद्ध हो सकता है। 

साथ ही, नियमों को ताक पर रखकर साइट से निकलने वाले मलबे को निर्धारित डंपिंग साइट के बजाय कनलोग क्षेत्र में अवैध रूप से फेंका जा रहा है। यह पूरी जमीन स्वभाव से वन भूमि बताई जा रही है।

सरकार व नगर निगम को नोटिस जारी

हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और नगर निगम शिमला सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने प्रतिवादी संबंधित प्राधिकारी को तुरंत विवादित साइट का निरीक्षण कर इस बात की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं कि नगर निगम के इस कार्य से कितने पेड़ प्रभावित हुए हैं, कितने पेड़ खतरे में हैं और क्या यह क्षेत्र वन भूमि के अंतर्गत आता है।

प्रशासन तुरंत ऐसे कदम उठाने को कहा गया है जिससे मौके पर मौजूद पेड़ों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे। इस मामले की अगली सुनवाई अब 13 अक्टूबर 2026 को तय की गई है।

 

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