शिमला के सिमट्री में 12 भवनों में आई दरारें, प्रशासन ने फोरलेन कार्य रोका; ढली-संजौली बाईपास सड़क भी प्रभावित
शिमला के समिट्री क्षेत्र में फोरलेन सुरंग निर्माण के दौरान हुई ब्लास्टिंग से 12 रिहायशी भवनों और ढली-संजौली बाईपास सड़क में दरारें आ गई हैं।

शिमला के सिमिट्री में भवनों में आई दरारें। जागरण
HighLights
शिमला में फोरलेन सुरंग ब्लास्टिंग से भवनों में दरारें आईं।
प्रशासन ने 12 प्रभावित भवनों के कारण निर्माण कार्य रोका।
जांच पूरी होने तक सुरंग निर्माण पर रोक लगाने का आदेश।
जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के समिट्री एवं आसपास के क्षेत्र में फोरलेन सुरंग निर्माण के दौरान हो रही ब्लास्टिंग से रिहायशी भवनों पर खतरा पैदा हो गया है। शांति विहार वार्ड के समिट्री से सटे रिहायशी क्षेत्र में कई मकानों की दीवारों और फर्श पर दरारें आ गई हैं। वहीं, ढली-संजौली बाईपास सड़क पर भी बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई दी हैं। प्रारंभिक तौर पर मेहता पेट्रोल पंप के निजी आवास सहित करीब 12 भवनों के प्रभावित होने की बात सामने आई है।
रिहायशी क्षेत्र के नीचे बन रही टनल
स्थानीय लोगों के अनुसार सुरंग निर्माण रिहायशी क्षेत्र के ठीक नीचे किया जा रहा है। आरोप है कि रात के समय भारी ब्लास्टिंग किए जाने से जमीन में कंपन पैदा हो रहा है। इससे भवनों में आई दरारें लगातार बढ़ रही हैं। लोगों ने प्रशासन से पूरे क्षेत्र का निरीक्षण करवाने और जांच पूरी होने तक सुरंग निर्माण रोकने की मांग उठाई।
कंपन मापने के लिए लगाए उपकरण
फोरलेन सुरंग निर्माण के दौरान क्षेत्र में पैदा हो रहे कंपन की तीव्रता जांचने के लिए एनएचएआई ने मौके पर उपकरण लगाए हैं। प्रभावित भवनों की वीडियोग्राफी भी करवाई जा रही है, ताकि भवनों की वर्तमान स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। क्षेत्र में सुरंग के ऊपर करीब 300 से 400 भवन होने की बात भी सामने आई है।
प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर रुकवाया काम
मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी और एसडीएम ग्रामीण मनजीत शर्मा ने मौके का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने फोरलेन का निर्माण कर रही कंपनी को तत्काल काम रोकने के आदेश दिए हैं। जांच पूरी होने तक आगे निर्माण नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
पूर्व महापौर ने भी उठाए सवाल
पूर्व महापौर संजय चौहान ने कहा कि सुरंग निर्माण के ऊपर बड़ी संख्या में भवन बने हैं और इनमें दरारें आना गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में उनके महापौर रहते अमेरिकी कंपनी से शहर का सर्वे करवाया गया था। इसमें सिमेट्री-ढली के आसपास के क्षेत्र को संवेदनशील बताया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि फोरलेन निर्माण के दौरान पहले किए गए सर्वे में बदलाव किया गया है। उन्होंने सुरंग निर्माण तत्काल रोककर नए सिरे से सर्वे और तकनीकी जांच करवाने की मांग की।
भट्टाकुफर में पहले भी सामने आ चुका है मामला
फोरलेन सुरंग निर्माण के कारण इससे पहले भट्टाकुफर क्षेत्र में भी भवनों में दरारें आने और सड़क में गड्ढा पड़ने की घटना सामने आ चुकी है। एक भवन भी इसकी जद में आकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ था। अब संजौली समिट्री के पास करीब 12 भवनों में दरारें आने के बाद प्रशासन ने निर्माण कार्य रोक दिया है।
