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'अस्थायी था राजस्व घाटा अनुदान', केंद्रीय मंत्री शेखावत की नसीहत; वित्तीय अनुशासन अपनाएं हिमाचल जैसे राज्य

By Rohit Sharma Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sun, 08 Feb 2026 04:38 PM (IST)

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने शिमला में हिमाचल सरकार पर राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) मामले में अपनी विफलता का ...और पढ़ें

शिमला में पत्रकारों से बातचीत करते केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत व सांसद सुरेश कश्यप। जागरण

शिमला में पत्रकारों से बातचीत करते केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत व सांसद सुरेश कश्यप। जागरण

HighLights

  1. शेखावत ने हिमाचल पर आरडीजी विफलता का आरोप लगाया।

  2. राजस्व घाटा अनुदान अस्थायी व्यवस्था थी, केंद्र ने मदद की।

  3. हिमाचल को वित्तीय अनुशासन और सुधार अपनाने की सलाह।

जागरण संवाददाता, शिमला। राजस्व घाटा अनुदान यानी रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) के मुद्दे पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने हिमाचल सरकार पर अपनी विफलता का ठीकरा केंद्र पर फोड़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने शिमला में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि आरडीजी अस्थायी व्यवस्था थी।

केंद्र ने हिमाचल समेत अन्य राज्यों को अपना राजकोषीय घाटा कम करने के लिए भरपूर सहायता की है, लेकिन इसके बावजूद भी हिमाचल में इसमें विफल रहा है। अब अपनी विफलता का ठीकरा केंद्र पर फोड़ा जा रहा है। 

बार-बार चेतावनियां दी गईं

12वें वित्त आयोग से शुरू यह प्रविधान बार-बार चेतावनियों के साथ आगे बढ़ाया गया, लेकिन इसे स्थायी व्यवस्था कभी नहीं माना गया। 15वें वित्त आयोग के दौरान कोविड जैसी असाधारण परिस्थिति में राज्यों को फ्रंट-लोडेड और रिकॉर्ड स्तर की सहायता दी गई। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को भी इस अवधि में पहले की सभी अवधियों की तुलना में कहीं अधिक आरडीजी सहायता मिली। 

व्यय अनुशासन अपनाना होगा

उन्होंने कहा कि अब वित्त आयोग ने स्पष्ट किया है कि निरंतर अनुदान के बजाय राज्यों को राजस्व बढ़ाने और व्यय अनुशासन अपनाने की दिशा में बढ़ना होगा। शेखावत ने कहा कि वित्तीय घाटा (फिस्कल डेफिसिट) आय और व्यय के अंतर का विषय है और इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि संरचनात्मक सुधारों से ठीक किया जा सकता है।

हिमाचल का कर्ज-जीडीपी अनुपात सावधानी का संकेत

उन्होंने चिंता जताई कि हिमाचल का कर्ज-जीडीपी अनुपात 40 प्रतिशत से ऊपर पहुंचना सावधानी का संकेत है और राज्य को दीर्घकालिक वित्तीय अनुशासन की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से भारत एक स्पष्ट लक्ष्य और तय मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि 2014 से पहले देश भ्रष्टाचार, नीतिगत अस्थिरता और आर्थिक निराशा के दौर से गुजर रहा था, लेकिन पिछले 11 वर्षों में निर्णायक नीतियों और संरचनात्मक सुधारों के कारण भारत आज विश्व की शीर्ष मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में चौथे स्थान पर सम्मानपूर्वक खड़ा है और तीसरे स्थान की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समझौतो में बागवानों के हित सुरक्षित

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और यूरोपियन यूनियन के साथ हुए समझौते पर से कषि पर उठ रहे सवालों पर शेखावत ने कहा कि किसानों, डेयरी, दाल, अनाज, सब्ज़ी और मसाला उत्पादकों के हित पूरी तरह सुरक्षित रखे गए हैं। गेहूं, चावल, दालें, सामान्य सब्ज़ियाँ, डेयरी उत्पाद, मसाले और अधिकांश फल श्रेणियों पर कोई बाज़ार खुलापन नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि सेब के मुद्दे पर कांग्रेस अनावश्यक राजनीति कर रही है। बाहर से आने वाला सेब 100 रुपए से कम लैंडिंग कीमत पर भारत नहीं आ सकता।  लगभग 80 रुपए न्यूनतम बेस प्राइस और उस पर 20 रुपए से 40 रुपए तक टैक्स जुड़ने के बाद ही आयात संभव है।  इसलिए स्थानीय बागवानों के हित सुरक्षित हैं।

आपदा के लिए बढ़ाया एनडीआरएफ-एसडीआरएफ फंड

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने एसडीआरएफ और एनडीआरएफ फंड में पिछले वर्षों में कई गुना वृद्धि की है और राज्यों को न केवल राहत बल्कि प्रिवेंटिव उपायों पर भी खर्च की अनुमति दी गई है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि जलवायु परिवर्तन के दौर में आपदा-पूर्व तैयारी पर अधिक निवेश किया जाए।



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