विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 16, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

तीखे तीरों से स‍ियासी जमीन की तलाश

By Edited By:
Published: Fri, 16 Dec 2016 12:57 AM (IST)Updated: Fri, 16 Dec 2016 12:01 PM (IST)

हिमाचल में विस चुनाव में अभी वक्त है लेकिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी की रैलियों के ...और पढ़ें

News Article Hero Image

डॉ. रचना गुप्ता : हिमाचल में विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है लेकिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों के बाद कांग्रेस जिस तरह आक्रामक हो रही है, उससे शीतकालीन सत्र काफी गर्म रहेगा। ऐसा नहीं है कि भाजपा के कड़े तेवरो को कांग्रेस सिर्फ कुंद करना चाहती है बल्कि वह कोई मौका ही देना नहीं चाहती, जिससे पार्टी की छीछालेदर हो। कई ध्रुवों में छिटकी कांग्रेस को अंदेशा है कि चार्जशीट के जरिए भाजपा हमला बोलेगी, इसीलिए नोटबंदी को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी की गई है। वहीं, कांग्रेस की ओर से राज्यपाल आचार्य देवव्रत को पहले ही सीधे-सीधे घेरने का प्रयास किया है। मुश्किलों से भरी डगर न सिर्फ भाजपा की है बल्कि कांग्रेस समेत वीरभद्र की भी बनी है। इसीलिए कांग्रेस की ओर से नरेंद्र मोदी की रैली का जवाब देने राहुल गांधी आ रहे है व भाजपा परंपरागत चार्जशीट के हथियार के साथ तैयार खड़ी है।

पढ़ें: वीरभद्र बोले, मेरे प्रदेश के दौरों से भाजपा को पड़ते हैं दौरे

यद्यपि कांग्रेस खुद में इतनी छिटकी है कि जनमानस तक शिद्दत से काम करने वाले विधायक ही बेड़ा पार करने की हैसियत रखते हो, वर्ना 'मैं' के टकराव में पार्टी जिस कगार पर खड़ी है उससे भाजपा राहत महसूस कर सकती है। बता दें पार्टी का चौथा सरकारी जलसा धर्मशाला में होगा। कांगड़ा जिले को पार्टी सबसे मजबूत आंकती है। वहीं से कैबिनेट मंत्री ने रैली में योगदान न देने की बात कही। कारण यही है कि यहां मंत्रियों ही नहीं, कांग्रेसियों में खासी दूरियां है। लेकिन राहुल गांधी के नाम पर रैली में मजबूरन शिरकत करवाने का दांव 'राजा' खेमे ने खेला है। वीरभद्र सिंह के दो करीबी जिस रणनीति से चल रहे है, वह विरोधियो को रास भी नहीं आएगा।

पढ़ें: अपने ही निशाने पर कांग्रेस

कैबिनेट मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने अंबिका सोनी, अहमद पटेल व राहुल गांधी से वीरभद्र सिंह के साथ मुलाकात करवाई और रैली में आने का न्योता दिया। वहीं, कैबिनेट मंत्री सुधीर शर्मा ने अपने विधानसभा हलके में आयोजन का दारोमदार लिया है। इसी विश्वस्त टीम के साथ वीरभद्र सिंह हमीरपुर से एक विधानसभा के उपचुनाव तक डटे रह सकते है। इसके बाद ही संगठन को लेकर नई नीति बनेगी जिसमें टिकटों के वितरण के लिए 'अपनों' का संगठन पर कब्जाना इस धड़े के लिए जरूरी होगा। यूं कतार में कई कांग्रेसियों की फेहरिस्त है जो सुखविंदर सिंह सुक्खू की किरकिरी बने हैं, जिसने संगठन में कई जिलाध्यक्ष बदलकर सीधे ही वीरभद्र सिंह धड़े को चुनौती दी है।

पढ़ें: साक्षात्कार : शासन करने वालों के पास नहीं नैतिक साहस : धूमल

वैसे मौजूदा अध्यक्ष सुक्खू को विद्या स्टोक्स का वरदहस्त खूब है। इसलिए मजबूत कुर्सी के आसरे सुक्खू के हौंसले भी बढ़े है परंतु कांग्रेस चाहती है कि विकास के नाम पर वोट मांगे जाएं। इसलिए रैली को इसी विषय के इर्द-गिर्द रखा है और कैबिनेट बैठकों में नौकरियां धड़ाधड़ बांटी जा रही है। हरसंभव सहानुभूति जनता से लेने का प्रयास है तभी अवैध भवन मामलों में 30 हजार लोगों को लाभ न मिलने के पीछे टीसीपी में संशोधन न किए जाने की बात राज्यपाल के पास मढ़ी गई है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने एक्ट पास किया परंतु राज्यपाल ने रोक दिया। वहीं, भाजपा द्वारा भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस के लोगो को छांट-छांट कर निशाना बनाने की कवायद का हल व्यक्तिगत बातचीत से निकाला जा रहा है। बहरहाल, धर्मशाला के तपोवन मे उठने वाली चिंगारियों से भड़की आग चुनाव के आने तक कई नेताओं के होश उड़ा सकती है। वहीं, कई पार्टियों को जनमत बटोरने में मशक्कत करनी पड़ सकती है।

हिमाचल प्रदेश की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें: