जागरण संवाददाता, शिमला : कुपोषण आज देश की सबसे बड़ी समस्या हो गई है। इसके लिए कहीं समाज और कहीं रीतियां भी जिम्मेदार हैं। पुरुष प्रधान समाज ने भी इस समस्या को अधिक भयावह कर दिया है। जंक फूड से कुपोषण की समस्या और बढ़ी है। पैक फूड, पॉलिशड अनाज के सेवन से बच्चे कुपोषण का शिकार बनते जा रहे हैं। आयुर्वेद विभाग के डॉ. तेजस्वी राजकीय महाविद्यालय संजौली में पोषण अभियान पर दो दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन आयुर्वेद विभाग, शिशु कल्याण विभाग व महाविद्यालय के सयुंक्त तत्वावधान में किया गया।

डॉ. तेजस्वी ने कहा कि जिन पारंपरिक दालों का सेवन कभी हमारे पूर्वज करते थे आज वे कल्पनाशील हो गई हैं। बाथू, कोद्रा, काउनी, फाफरा जैसी ऋतु युक्त फसलें गायब हो गई हैं। प्रदूषित जल के सेवन से भी बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। नवजात शिशु के लिए मां का दूध सबसे जरूरी होता। लेकिन आधुनिकता से प्रभावित होकर कई प्रातों में माताएं शिशुओं को इससे वंचित रख रही हैं। यह भी कुपोषण का कारण है। कार्यशाला में प्राचार्य डॉ. सीबी मेहता ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि आज हमें अपने जीवन को ख़ुद जानने की जरूरत है। यदि हम जीवन के प्रति ईमानदार नहीं हुए तो स्थिति वही हो जाएगी जो कुपोषित देशों की है। उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों को पोषण आहार के प्रति सचेत रहने की शपथ दिलाई।

विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित कार्यशाला के दौरान महाविद्यालय में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया। पोस्टर मेकिंग, नारा लेखन, पेंटिंग, कोलाज और भाषण प्रतियोगिताएं करवाई गई। इनमें प्रथम द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।