हिमाचल में कर्मचारियों के तबादलों के नियम बदलेंगे, डिप्टी CM मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में बनी उप समिति
हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों के तबादला नियमों की समीक्षा के लिए उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में एक उप-समिति गठित की गई है।

कर्मचारी तबादलों के लिए बदलेंगे नियम, उप मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बनी सब कमेटी।
HighLights
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में उप-समिति गठित।
तबादलों के मार्गदर्शक सिद्धांत-2013 की होगी समीक्षा।
गृह जिले और अंतर-जिला तबादलों के लिए नए नियम।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर लगी रोक हटने की उम्मीद के बीच सरकार ने पूरी तबादला व्यवस्था को नए सिरे से कसने की तैयारी कर ली है। तबादलों के मार्गदर्शक सिद्धांत-2013 (सीजीपी-2013) में बदलाव की समीक्षा के लिए उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कैबिनेट सब कमेटी गठित की गई है।
कमेटी की सिफारिशों के आधार पर गृह जिले और एक ही जिले के भीतर तबादलों के लिए नए दिशा-निर्देश बनेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री कमेटी के अध्यक्ष होंगे।
जबकि कृषि मंत्री चंद्र कुमार, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी समिति के सदस्य होंगे। प्रधान सचिव (कार्मिक) एम सुधा देवी कमेटी की सदस्य सचिव होगी। समिति मौजूदा तबादला नीति के प्रविधानों की समीक्षा कर सरकार को अपनी सिफारिशें देगी। अंतिम निर्णय कैबिनेट में होगा
छह हजार आवेदन, फैसले का इंतजार
तबादलों पर लगे प्रतिबंध हटने की राह देख रहे कर्मचारियों को फिलहाल और इंतजार करना पड़ सकता है। प्रदेश में छह हजार से अधिक तबादला आवेदन लंबित हैं और नई व्यवस्था का फैसला इन आवेदनों के भविष्य को भी प्रभावित करेगा।
सामान्य तबादलों पर प्रतिबंध के कारण नियमित स्थानांतरण नहीं हो पा रहे हैं। विशेष परिस्थितियों और रिक्त पदों के आधार पर ही कुछ तबादले किए जा रहे हैं। अब नियमों की समीक्षा के लिए समिति बनने से कर्मचारियों की उम्मीदें उसके फैसले पर टिक गई हैं।
कैबिनेट में उठा था हस्तक्षेप का मामला
बीते 11 अक्टूबर को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने अपने विधानसभा क्षेत्र में कर्मचारियों के तबादलों में कथित हस्तक्षेप का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें विश्वास में लिए बिना स्थानांतरण करवाए जा रहे हैं और एक युवा नेता अपनी मर्जी से तबादले करवा रहा है।
कैबिनेट में जब यह मामला सामने आया तो अन्य मामलों को भी रखा गया। बैठक में न्यायालय के आदेशों और प्रशासनिक पहलुओं पर भी चर्चा हुई थी। इसके बाद ही तबादला व्यवस्था की समीक्षा के लिए कैबिनेट सब कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया।
जनवरी में खुली, अप्रैल में फिर लगी रोक
प्रदेश सरकार ने 14 जनवरी को सामान्य तबादलों पर लगा प्रतिबंध हटाया था, लेकिन छह अप्रैल को फिर से रोक लगा दी गई। चार जून को मुख्य सचिव ने आदेश जारी कर प्रतिबंध जारी रखने के निर्देश दिए थे। तब से कर्मचारी रोक हटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
अक्टूबर-नवंबर में राहत की उम्मीद भी पूरी नहीं हुई। अब सरकार ने नियमों की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसे में कर्मचारियों के सामने दोहरी अनिश्चितता है कि तबादलों पर प्रतिबंध कब हटेगा और नई नीति में उनके लिए क्या शर्तें तय होंगी। हिमाचल में 1.77 लाख सरकारी कर्मचारी हैं।
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