राज्य ब्यूरो, शिमला : हिमाचल के सरकारी स्कूलों में बोर्ड परीक्षाओं में जिन शिक्षकों का परिणाम पिछले वर्ष के मुकाबले आधे से भी कम आया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की कवायद तेज हो गई है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने इस मामले में जिला उपनिदेशकों को फटकार लगाई थी। इसके बाद अब उच्च शिक्षा निदेशालय को स्कूलों की रिपोर्ट मिलनी शुरू हो गई है।

अभी तक नौ जिलों से पिछले वर्ष के मुकाबले आधे से कम परिणाम देने वाले शिक्षकों की रिपोर्ट निदेशालय को सौंप दी गई है। निदेशालय को बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, किन्नौर, मंडी, शिमला, सोलन, सिरमौर व ऊना जिला से स्कूलों की रिपोर्ट सौंपी गई है। कांगड़ा, कुल्लू व लाहुल स्पीति जिलों के स्कूलों की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। इन जिलों की रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई शुरू की जाएगी। इससे पहले शिक्षा विभाग द्वारा खराब परिणाम देने वाले 38 शिक्षकों पर कार्रवाई की जा चुकी है। जिन शिक्षकों का बोर्ड की परीक्षा का परिणाम पहले के मुकाबले आधा रह गया है, उन पर कार्रवाई की जाएगी। नीति में स्पष्ट है कि जिस शिक्षक ने नौ महीने से अधिक समय तक विद्यार्थियों को पढ़ाया है, परिणाम के लिए वही जवाबदेह होगा। बोर्ड की परीक्षा का परिणाम घटने की स्थिति में उसी शिक्षक पर कार्रवाई होगी जिसकी कक्षा में पांच से अधिक विद्यार्थी होंगे। शिक्षकों की बात सुने बिना कार्रवाई गलत

प्रदेश सरकार द्वारा बोर्ड की परीक्षा में खराब परिणाम देने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई गलत है। शिक्षकों की बात सुने बिना ही उन पर कार्रवाई की गई है। शिक्षकों का पक्ष सुना जाना चाहिए था।

वीरेंद्र चौहान, प्रदेशाध्यक्ष, राजकीय अध्यापक संघ तीन जिलों से रिपोर्ट मिलने पर होगी कार्रवाई

अभी नौ जिलों के स्कूलों की रिपोर्ट मिली है। अन्य तीन जिलों से रिपोर्ट आने के बाद पहले के मुकाबले कम परिणाम देने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. सोनिया ठाकुर, संयुक्त निदेशक, उच्च शिक्षा विभाग।

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