जागरण संवाददाता, शिमला : राजधानी शिमला के रिज मैदान पर 72वां हिमाचल दिवस समारोह सोमवार को उल्लास के साथ मनाया गया। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने हिमाचल दिवस के राज्यस्तरीय समारोह के दौरान राष्ट्र ध्वज फहराया और मार्च पास्ट की सलामी ली।

राज्यपाल ने कहा कि राज्य की समृद्ध संस्कृति, उच्च परंपराएं और असीम प्राकृतिक सौंदर्य देवभूमि की विशिष्ट पहचान है। उन्होंने प्रदेश के युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिता व्यक्त की और कहा कि यह समाज के लिए घातक संकेत है। युवाओं को सार्थक ढंग से राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास करने होंगे। नशे के खिलाफ सभी को मिलकर कार्य करना होगा ताकि युवाओं को नशे के कुप्रभावों के संबंध में जागरूक किया जा सके। इसमें शिक्षण संस्थानों, समाज के सभी वर्ग, युवाओें और अभिभावकों को जोड़कर एक प्रभावी संदेश देना होगा। उन्होंने समाज के हर वर्ग से आग्रह किया कि वे इस सामाजिक बुराई के खिलाफ मजबूती से पहल करें और प्रदेश को सशक्त करने के लिए शपथ लें। उन्होंने देश के लिए कुर्बानी देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम व जिला चुनाव विभाग द्वारा मतदाता जागरूकता के लिए प्रस्तुत लघु नाटिका आकर्षण का केंद्र रही। इस बार लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सिर्फ शिमला स्थित रिज मैदान पर ही कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गुरुकुल के ब्रह्माचारियों ने दिखाया दमखम

हिमाचल दिवस समारोह में गुरुकुल कुरुक्षेत्र के 47 ब्रह्माचारियों ने हैरतअंगेज प्रदर्शन कर दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया। व्यायाम शिक्षक अनिल आर्य के निर्देशन में अमनदीप, यक्ष, लक्ष्य आदि ब्रह्माचारियों ने मलखंब पर सूर्य नमस्कार, सलामी, बगल की पकड़, ब्रह्माचार्य आसन, पद्मासन, दंडासन, हलासन, मयूरासन व दंड बैठक का प्रदर्शन किया।

गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी नाम दर्ज करवा चुके गुरुकुल कुरुक्षेत्र के छात्र उत्तम ने भी जिम्नास्टिक की प्रस्तुति दी। उत्तम एक मिनट में 60 बैकफ्लिप लगाने का रिकॉर्ड बना चुके हैं। मलखंब क्रियाओं में नौ वर्ष के बच्चों दक्ष और केशव के करतबों ने खूब तालियां बटोरी। गुरुकुल कुरुक्षेत्र के संरक्षक एवं राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि मलखंब को जीवन में शामिल करने से कई बीमारियां दूर होती हैं। युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक दिशा देने में ऐसी खेल गतिविधियां कारगर सिद्ध होंगी। गुरुकुल कुरुक्षेत्र हमारी पारंपरिक व आधुनिक शिक्षा का समावेश है। मलखंब हमारा पारंपरिक खेल है जिसका प्रदर्शन ऐसे अवसरों पर होने से अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी।

Posted By: Jagran

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