प्रकाश भारद्वाज, शिमला

नई दिल्ली समेत अन्य राज्यों के लोग हिमाचल की शांत वादियों में घर बनाकर रहना चाहते हैं। भाजपा के सत्ता में आने के बाद अन्य राज्यों के कुछ लोगों का सपना सच हुआ है। प्रदेश सरकार ने ऐसे 40 आवेदनों में से नौ लोगों को मकान बनाने की अनुमति प्रदान कर दी है।

प्रदेश में धारा 118 के तहत मकान बनाने को लेकर जमीन खरीदने के लिए आवेदन आए थे। इनमें प्रदेश से भी आवेदन थे। तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद अन्य राज्यों के लोग भी हिमाचल में जमीन खरीद पाएंगे। लोगों ने सिरमौर, सोलन व शिमला में रिहायश के लिए जमीन खरीदने के लिए आवेदन किया है। जिला उपायुक्तों के माध्यम से स्वीकृत होकर सचिवालय पहुंचे मामलों की फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय तक आई। इस प्रकार के सभी आवेदन इस वर्ष के शुरुआत में मार्च-अप्रैल के दौरान किए गए थे। इनमें से नौ मामलों को मंजूरी प्रदान की गई। इनमें से सात मामले प्रदेश के चार जिलों से संबंधित हैं। यह जानकारी राजस्व विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है। जमीन बेचने व खरीदने वाले दोनों अन्य राज्यों के

इस साल गृह निर्माण के लिए जो स्वीकृतियां प्रदान की गई, उनमें जमीन बेचने वाले और खरीदार दोनों अन्य राज्यों से हैं। पंजाब एसएएस नगर मोहली की अजीत कौर ने कंडाघाट में 91.149 वर्गमीटर जमीन बेचने की इजाजत मांगी। नई दिल्ली के द्वारका सेक्टर के रविंद्र नाथ मल्होत्रा ने यह जमीन खरीदने की इच्छा जताई। यह मामला सोलन जिला से आया था जिसे सरकार ने मंजूरी प्रदान की। कसौली में जमीन व मकान बेचने का प्रस्ताव मंजूर

नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश के राकेश कुमार ने कसौली में 421 वर्गमीटर जमीन और उस पर बने मकान को बेचने का मामला भेजा। ग्रेटर कैलाश के ही मनीष शर्मा ने रिहायश के लिए यह जमीन व मकान खरीदने के लिए आवेदन किया। सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। स्वीकृति के लिए पेश किए गए 18 आवेदन

आठ महीने के भीतर रहने के लिए मकान बनाने के 31 मामले आए थे। इनमें से सिरमौर जिला से दस, शिमला जिला से 11 व शेष आवेदन सोलन, मंडी व कांगड़ा से प्राप्त हुए। 18 आवेदन स्वीकृति के लिए पेश किए गए थे। कांग्रेस कार्यकाल में मिली अनुमति

जमीन बेचने का विरोध कर रही विपक्षी कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए वर्ष दर वर्ष प्रदेश व अन्य राज्यों के लोगों को मकान बनाने के लिए जमीन देने के आवेदनों पर स्वीकृतियां प्रदान की थीं। कांग्रेस कार्यकाल में मकान बनाने के लिए हर वर्ष जमीन आवंटित हुई। वर्ष 2015 में 18 आवेदनों को मंजूरी प्रदान की गई। वर्ष 2016 में 32 आवेदनों को मंजूरी दी गई। वर्ष 2017 में 22 आवेदन स्वीकृत हुए थे।

Posted By: Jagran