शिमला, रविंद्र शर्मा। हिमाचल प्रदेश मे डेंगू का कहर थमा नहीं है। प्रदेश में ठंड बढऩे के बावजूद डेंगू के मच्छर सक्रिय हैं। यही कारण है कि प्रदेश में आए दिन कई मरीज डेंगू का शिकार हो रहे हैं। चार दिसंबर तक प्रदेश में डेंगू के मरीजों का आंकड़ा 4700 के पार हो चुका है जबकि छह लोगों की मौत हुई है। प्रदेश में डेंगू के मरीजों की बढ़ती संख्या प्रशासन सहित स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे रोग की रोकथाम के दावों की पोल खोल रही है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार चार दिसंबर तक प्रदेशभर में डेंगू से ग्रस्त मरीजों की सबसे अधिक संख्या जिला बिलासपुर में है। यहां पर डेंगू के मरीजों का आंकड़ा 2000 को पार कर गया है। दूसरे नंबर पर जिला सोलन है जहां पर डेंगू के मरीजों का आंकड़ा 1700 को पार कर चुका है। प्रदेश के अस्पतालों में अब तक डेंगू के संदिग्ध 18015 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई है। इनमें 4739 लोगों में बीमारी की पुष्टि हुई है। हिमाचल के दो जिले बिलासपुर और सोलन में यह बीमारी लगातार पांव पसारती जा रही है। प्रदेश की राजधानी शिमला में भी कई लोग डेंगू का शिकार हो रहे हैं। शिमला में डेंगू के मरीजों को आंकड़ा 133 के करीब पहुंच गया है। हैरानी की बात यह है कि ठंड में भी डेंगू से ग्रस्त मरीज सामने आ रहे हैं। 

किस जिले में डेंगू के कितने मामले 

जिला              मरीज 

बिलासपुर        2035 

कांगड़ा             148 

कुल्लू                4 

हमीरपुर            12 

मंडी                 588 

सोलन            1720 

सिरमौर             10 

शिमला            133 

ऊना                  81 

चंबा                     8 

डेंगू से कहां कितनी मौतें 

बिलासपुर           1 

मंडी                    1 

कांगड़ा                1 

सिरमौर              1 

सोलन                1 

ऊना                   1   

विभाग पूरी तरह सतर्क 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री विपिन परमार ने बताया कि बीमारी की रोकथाम के लिए विभाग पूरी तरह सतर्क है। अस्पतालों में मरीजों का निशुल्क उपचार किया जा रहा है। लोगों को अपने आसपास के क्षेत्र में साफ सफाई रखने की अपील की जा रही है। उन्होंने लोगों से बुखार होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की है। 

डेंगू के लक्षण

ठंड के साथ तेज बुखार, सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द, कमजोरी, भूख न लगना, जी मिचलाना, मुंह का स्वाद खराब होना, लाल-गुलाबी चकत्ते, नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उलटी में खून, बेहोशी आना, ब्लड प्रेशर अनियंत्रित और अंत में मल्टी ऑर्गन फेल्योर हो जाता है।

ऐसे करें बचाव

-घर, ऑफिस के आसपास पानी न इकट्ठा होने दें।

-घर में टूटे-फूटे डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें आदि न रखें।

-मच्छर साफ पानी में पनपता है, इसलिए पानी की टंकी बंद रखें।

-खिड़की- दरवाजों पर जाली लगाएं।

-कीटनाशक का छिड़काव करें।

-शरीर पूरी तरह ढक कर रखें।

-मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।

-बुखार होने पर पैरासिटामोल लें।

-एस्प्रिन (डिस्प्रिन, इकोस्प्रिन) या पेनकिलर बिल्कुल न लें।

 

Posted By: Babita