-विजिलेंस के बाद पुलिस को सौंपी गई थी जाच

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-शिमला पुलिस ने पूरी की जाच तत्कालीन प्रबंध निदेशक समेत कई अधिकारी हैं आरोपित

-पूर्व मुख्य महाप्रबंधक आरके गुप्ता भी हैं आरोपित, हुई थी भर्ती में धांधली

राज्य ब्यूरो, शिमला : करीब 16 साल पहले कंडक्टर भर्ती में अनियमितताएं बरतने के मामले में पुलिस शिमला की कोर्ट में अब चार्जशीट दाखिल करेगी। जाच लगभग पूरी हो गई है। जाच में पाया गया कि भर्ती में बड़े पैमाने पर धांधली हुई थी। इसमें कई अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है। इनमें तत्कालीन प्रबंध निदेशक समेत कई अधिकारियों के शामिल होने का आरोप है। पहले इसी भर्ती की विजिलेंस ने जाच की थी, लेकिन तब एफआइआर दर्ज नहीं हुई। कोर्ट के आदेश के बाद शिमला पुलिस ने 2018 में केस दर्ज किया था। अब जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा चलेगा। आरोपितों में कुछ समय पहले ही हिमाचल पथ परिवहन निगम(एचआरटीसी) के मुख्य महाप्रबंधक पद से रिटायर हुए आरके गुप्ता भी शामिल हैं। पुलिस नहीं थी जाच की इच्छुक

शिमला पुलिस ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि इस मामले की विजिलेंस से ही जाच करवाई जाए। ऐसा पुलिस ने तब किया था जब कोर्ट ने पांच अधिकारी के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया था। शिमला पुलिस ने कोर्ट को यह मामला इस तर्क के साथ वापस भेजा था कि पीसी एक्ट के तहत जाच डीएसपी स्तर के अधिकारी करते हैं जबकि सदर पुलिस थाना में इंस्पेक्टर कार्यरत हैं। लेकिन बाद में कोर्ट ने इस तर्क को नहीं माना

378 कंडक्टर हुए थे भर्ती

2003- 2004 में एचआरटीसी में 378 कंडक्टर भर्ती हुए थे। लेकिन इसमें अपात्र लोगों की भी भर्ती हो गई थी। इसकी शिकायत विजिलेंस से की गई थी। विजिलेंस ने दो बार प्रारंभिक जाच की थी और एफआइआर दर्ज करने का निर्देश दिया था, लेकिन तब एफआइआर दर्ज नहीं हो पाई थी। पुलिस भर्ती भी हुई थी रद

पिछले साल हिमाचल पुलिस में कास्टेबल के 1063 पदों के लिए लिखित परीक्षा हुई थी। इसमें करीब 39000 अभ्यíथयों ने भाग लिया था। परीक्षा 11 अगस्त, 2019 को हुई, लेकिन कागड़ा के एक सेंटर में फर्जीवाड़ा हो गया। लिखित परीक्षा के दौरान कुछ युवक दूसरे के बदले परीक्षा देते हुए पकड़े गए थे। परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी और नकल के लिए हाईटेक उपकरण इस्तेमाल किए गए थे इसके आधार पर पुलिस ने एफ आई आर दर्ज की और 29 आरोपितों को गिरफ्तार किया। जाच से पता चला था कि पुलिस भर्ती के लिए पैसे का लेनदेन हुआ था हालाकि पेपर लीक नहीं हुआ था इसके बाद राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया और पुलिस भर्ती रद कर दी। इसके बाद 8 सितंबर को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। इस परीक्षा के लिए कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए थे इसमें किसी भी प्रकार की धार लिया होने की कोई भी शिकायतें नहीं आई थी।

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