विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

38 हजार करोड़ की निर्माणाधीन फोरलेन परियोजनाओं में 3 अड़चनें, NHAI ने हिमाचल के मुख्य सचिव को लिखा पत्र

By Parkash Bhardwaj Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 12 Oct 2026 05:35 PM (IST)Updated: Mon, 12 Oct 2026 05:53 PM (IST)

एनएचएआई ने हिमाचल प्रदेश में 38 हजार करोड़ की फोरलेन परियोजनाओं में आ रही तीन प्रमुख अड़चनों को लेकर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है।

एनएचएआई ने हिमाचल प्रदेश के फोरलेन प्रोजेक्ट के अड़चन का मुद्दा सरकार से उठाया है। प्रतीकात्मक फोटो

एनएचएआई ने हिमाचल प्रदेश के फोरलेन प्रोजेक्ट के अड़चन का मुद्दा सरकार से उठाया है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. शिमला बाईपास पर मलबा डंपिंग में ग्रामीणों का विरोध।

  2. ब्यास नदी की ड्रेजिंग न होने से मनाली फोरलेन को खतरा।

  3. चक्की में राज्य सरकार के टोल बैरियर को शिफ्ट करने की मांग।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में 38 हजार करोड़ की फोरलेन परियोजनाओं में आ रही अड़चनों को लेकर एनएचएआई निदेशक संतोष कुमार यादव ने मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत को पत्र लिखा है। पत्र में 3 मुद्दों पर व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करने का आग्रह किया है। अवगत करवाया है कि 28 किमी के शिमला बाईपास में ग्रामीण डंपिंग नहीं करने दे रहे हैं।

शुंगल गांव के स्थानीय लोग डंपिंग साइट (1.4 हेक्टेयर) के लिए एक्सेस रोड का उपयोग करने नहीं दे रहे हैं। इस साइट में 6 लाख घन मीटर मलबा डाला जाना है।

इस बाईपास के लिए 40.3 हेक्टेयर वन भूमि का डायवर्जन हो चुका है, लेकिन सुरंग और कटिंग से निकलने वाले मलबे के लिए डंपिंग सबसे बड़ी समस्या है। हाल ही में सरकार ने मलबा हटाने की शक्तियां डीडीएमए को दी है, फिर भी मौके पर विरोध जारी है। 

चार बड़ी परियोजनाएं

प्रदेश सरकार को जानकारी दी है कि कीरतपुर-मनाली 12,939 करोड़, पठानकोट-मंडी 10,805 करोड़, परवाणू-शिमला 8,950 करोड़ और शिमला-मटौर 10,226 करोड़ लागत की 4 बड़ी फोरलेन परियोजनाएं 2026-28 तक पूरी होनी हैं। लेकिन मलबा डंपिंग, ड्रेजिंग और टोल बैरियर जैसी स्थानीय स्तर की अड़चनों के परिणाम स्वरूप निर्माणाधीन फोरलेन परियोजनाओं की लागत और समय दोनों बढ़ रहे हैं। 

ब्यास नदी की ड्रेजिंग नहीं हुई तो बह जाएगा मनाली फोरलेन

एनएचएआई ने प्रदेश सरकार को अवगत करवाया है कि यदि ब्यास नदी की ड्रेजिंग नहीं हुई तो मनाली फोरलेन बह जाएगा। प्रदेश सरकार से मांग की है कि यदि पंडोह बाईपास-टकोली-कुल्लू-मनाली के बीच ब्यास नदी की ड्रेजिंग (गाद निकालना) का कार्य किया जाए। ये भी बताया है कि नदी का स्तर बढ़ने से रिवर बैंक और हाईवे दोनों को खतरा है और गाद निकालने का काम राज्य सरकार का है।

टोल बैरियर शिफ्ट किया जाए

तीसरी मांग के तहत बताया है कि चक्की में राज्य सरकार के टोल बैरियर को एनएच-154 पर शिफ्ट किया जाए। यह टोल बैरियर कांगड़ा के चक्की में हिमाचल सरकार का एंट्री टैक्स वसूलने का है।

यह भी पढ़ें: गगल में 1.28 करोड़ तो बाग में 24 लाख प्रति कनाल मुआवजा, कांगड़ा हवाई अड्डा विस्तार प्रभावितों ने दरों पर उठाए सवाल