गगल में 1.28 करोड़ तो बाग में 24 लाख प्रति कनाल मुआवजा, कांगड़ा हवाई अड्डा विस्तार प्रभावितों ने दरों पर उठाए सवाल
कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार से प्रभावित परिवार जमीन मुआवजे की दरों में बड़े अंतर पर सवाल उठा रहे हैं। ...और पढ़ें

कांगड़ा हवाई अड्डा विस्तार के दौरान भूमि मुआवजे पर सवाल उठ रहे हैं। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
कांगड़ा हवाई अड्डा विस्तार: मुआवजे की दरों में भारी अंतर।
गगल, इच्छी, बाग क्षेत्रों में दरों पर उठे सवाल।
पारदर्शी समीक्षा और पुनर्वास की मांग की गई।
संवाद सूत्र, चैतड़ू (कांगड़ा)। कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तारीकरण को लेकर प्रभावित परिवारों ने जमीन के मुआवजे की दरों में बड़े अंतर पर सवाल उठाए हैं। इच्छी, बरसवालकर और बाग क्षेत्र के प्रभावितों का कहना है कि एक ही परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण होने के बावजूद मुआवजे की दरों में काफी अंतर बताया जा रहा है।
प्रभावित अविनाश के अनुसार, गग्गल में फैक्टर-1 सहित मुआवजा करीब 1.28 करोड़ रुपये प्रति कनाल, इच्छी में 56 लाख रुपये और बाग में 24 लाख रुपये प्रति कनाल बताया जा रहा है। उन्होंने इन दरों के निर्धारण के आधार की निष्पक्ष समीक्षा करने की मांग उठाई है।
प्रभावित अविनाश के मुताबिक, गगल में जमीन की दर करीब 64 लाख रुपये प्रति कनाल है, जो फैक्टर-1 के बाद 1.28 करोड़ रुपये हो जाती है। इच्छी में यह दर 28 लाख रुपये प्रति कनाल और फैक्टर-1 के बाद 56 लाख रुपये, जबकि बाग में 12 लाख रुपये प्रति कनाल और फैक्टर-1 के बाद करीब 24 लाख रुपये बताई गई है। ये आंकड़े प्रभावित पक्ष की ओर से दिए गए हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
मुआवजे पर उठाए सवाल
प्रभावित परिवारों का कहना है कि जमीन और मकान अधिग्रहित होने के बाद दूसरी जगह जमीन खरीदकर घर बनाना और परिवार को दोबारा बसाना आसान नहीं होगा। अविनाश ने कहा कि मुआवजा तय करते समय केवल जमीन की कीमत ही नहीं, बल्कि परिवारों के पुनर्वास और भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
पारदर्शी समीक्षा की मांग
प्रभावितों के मुताबिक उनकी मांग गगल के लोगों का मुआवजा कम करवाने की नहीं है, बल्कि सभी क्षेत्रों में निर्धारित दरों के आधार की पारदर्शी समीक्षा करने की है। उन्होंने प्रशासन और सरकार से आग्रह किया कि इच्छी, बरसवालकर और बाग सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की समस्याएं सुनी जाएं तथा दरों में अंतर के कारण स्पष्ट किए जाएं।
प्रभावितों का कहना है कि एयरपोर्ट विस्तार को लेकर जारी चर्चाओं के बीच उनके मुआवजे और पुनर्वास के मुद्दे को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि वे नई जगह पर सम्मानपूर्वक जीवन शुरू कर सकें।
