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सेब ढुलाई के लिए बगीचे में दौड़ती है मोनोरेल, चीन से मंगवाए इंजन और ट्रैक; शिमला के किसान ने बताया कितना आया खर्च

Published: Sat, 10 Oct 2026 11:46 AM (GMT+05:30)

शिमला के कोटखाई के बागवान सुनील चौहान ने सेब ढुलाई की समस्या के समाधान के लिए अपने बगीचे में मोनोरेल स्थापित की है।

HighLights

  1. शिमला के बागवान ने सेब ढुलाई के लिए मोनोरेल लगाई

  2. चीन से मंगवाए इंजन और ट्रैक, 4.20 लाख रुपये खर्च

  3. मजदूरों की कमी दूर करने में सहायक, सफल परीक्षण हुआ।पगसो

जागरण संवाददाता, शिमला। बगीचों में सेब ढुलाई के लिए बागवानों को हर साल मजदूरों की कमी से जूझना पड़ता है। खासकर ढलानदार जमीन वाले बगीचों में सेब की ढुलाई करना चुनौतीपूर्ण रहता है।

इस समस्या का समाधान शिमला जिले के कोटखाई के ढांगवी गांव के बागवान सुनील चौहान ने मोनोरेल के रूप में तलाशा है। उन्होंने अपने बगीचे में मोनोरेल स्थापित की है, जिसका सफल परीक्षण भी किया जा चुका है।

सुनील चौहान ने बगीचे में 100 मीटर लंबा मोनोरेल ट्रैक तैयार करवाया है। इसमें नौ हार्स पावर का इंजन लगाया है। बागवान के अनुसार, इससे एक बार में करीब 500 किलो सेब की ढुलाई की जा सकती है।

यह मोनोरेल 45 डिग्री तक की ढलान पर भी काम करने में सक्षम है। मोनोरेल के लिए इंजन और ट्रैक चीन के ग्वांगझू से मंगवाए हैं। पूरी व्यवस्था स्थापित करने पर करीब 4.20 लाख रुपये खर्च हुए हैं।

इसमें सरकार की ओर से 50 हजार रुपये की सब्सिडी भी मिली है। मजदूरों की कमी को देखते हुए सुनील चौहान ने यह कदम उठाया है।

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तीन बगीचों में होता है 4500 पेटी सेब उत्पादन 

सुनील चौहान के पास सेब के तीन बगीचे हैं। इनमें से फिलहाल एक में मोनोरेल लगाई है। सफल परीक्षण के बाद दूसरे बगीचे में भी इसे लगाने की योजना है।

वह सघन बागवानी तकनीक के साथ पुराने बगीचे में टॉप ग्राफ्टिंग के जरिये नई किस्मों के सेब भी तैयार कर रहे हैं। उनके अनुसार, सालाना करीब 4000 से 4500 पेटी सेब का उत्पादन होता है। आगामी सेब सीजन में मोनोरेल से ढुलाई शुरू करने की तैयारी है

मंडी के पलौहटा में जल्द दौड़ेगी बागवानी मोनो रेल मंडी जिले के सुंदरनगर के पलौहटा-2 क्लस्टर में बागवानी मोनो रेल परियोजना जल्द आरंभ होगी।

300 मीटर फैला है ट्रैक

एचपी शिवा परियोजना के तहत एशियाई विकास बैंक के सहयोग से मोनो रेल के करीब 300 मीटर ट्रैक का निर्माण पूरा कर इसका सफल परीक्षण हो चुका है।

परियोजना के पहले चरण में करीब एक किलोमीटर लंबा मोनो रेल ट्रैक तैयार किया जा रहा है। इससे बागवानों को बगीचों से तैयार फलों की ढुलाई में सुविधा मिलेगी।

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