जागरण संवाददाता, शिमला : भाजपा के सबसे बड़े पद को संभालने वाले जेपी नड्डा ने पहला चुनाव हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में जीता था। उन्होंने 1982-83 में केंद्रीय छात्र परिषद के चुनाव में अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा। उनके खिलाफ इंद्र प्रत्याशी थे। दोनों प्रत्याशियों को बराबर वोट मिले। समझौते के तहत दोनों को अध्यक्ष चुना गया।

नड्डा ने विश्वविद्यालय की शिक्षा पूरी होने के बाद भाजपा में कई अहम पदों पर सेवाएं दीं। उन्होंने वर्ष 1993 में पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा। वह बिलासपुर सदर सीट से विधायक चुने गए। उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। उन्होने वर्ष 1998 तक नेता प्रतिपक्ष के पद पर सेवाएं दीं। प्रदेश में वर्ष 1998 में जब भाजपा की सरकार बनी तो उन्हें स्वास्थ्य विभाग का अहम जिम्मा सौंपा गया। पांच साल तक उन्होंने इस पर सेवाएं दीं।

वर्ष 2007 में चुनाव जीतकर वह विधानसभा पहुंचे। उन्हें वन एवं पर्यावरण मंत्री बनाया गया। इस दौर में नड्डा अपनी सरकार होने के बावजूद सियासी खींचतान में फंसे रहे। उन्होंने वर्ष 2010 में मंत्री पद छोड़कर संगठन में सेवाएं देनी शुरू कीं। नड्डा हिमाचल से लेकर देश का स्वास्थ्य विभाग संभाल चुके हैं। नड्डा 16 साल की उम्र में जेपी आंदोलन से जुड़ गए थे। इसके बाद वह छात्र राजनीति में आए। वर्ष 1982 में उन्हें हिमाचल में विद्यार्थी परिषद का प्रचारक बनाकर भेजा गया। यहां उन्होंने छात्र राजनीति शुरू की थी।

Posted By: Jagran

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