नाहन, राजन पुंडीर। प्रदेश के सबसे बड़े टैक्स घोटाले में प्रदेश सरकार ने हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय को पत्र लिखकर इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश सरकार द्वारा प्रवर्तन निदेशालय के सहायक निदेशक को लिखे पत्र में कहा गया है कि इंडियन टेक्नोमैक कंपनी के घोटाले में जो भी दोषी हों, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। चाहे वह आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारी हों या पुलिस विभाग के। 

ज्ञात हो कि करीब छह हजार करोड़ के इंडियन टेक्नोमैक कंपनी घोटाले में आबकारी एवं कराधान विभाग को 22 सौ करोड़, एक दर्जन से अधिक बैंकों के 1600 करोड़, आयकर विभाग के 750 करोड़, विद्युत बोर्ड के छह करोड़, ईपीएफ के तीन करोड़ व श्रम विभाग के तीन करोड़ का गबन कर कंपनी का मुख्य प्रबंध निदेशक फरार हो चुका है। वहीं सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जब मार्च 2014 में आबकारी एवं कराधान

विभाग के इकोनॉमिक्स इंटेलीजेंस यूनिट के अधिकारियों ने इस फैक्ट्री को टैक्स में भारी अनियमितताओं के कारण सील किया था, तो क्यों 700-800 टन स्क्रैब कंपनी से बाहर जाने दिया गया। किसकिस

अधिकारी की स्वीकृति के बाद सील कंपनी होने के बाद यह स्क्रैब बाहर गया। उनके खिलाफ भी कार्रवाई अमल में लाई जाए।

ज्ञात हो कि छह हजार करोड़ के घोटाले की जांच हिमाचल स्टेट सीआइडी कर रही है। मामला जब चार वर्ष तक लटका रहा, तो सरकार ने इस मामले को मनी लॉड्रिंग का मामला देखते हुए इंडियन टेक्नोमैक के घोटाले को मार्च 2018 में प्रवर्तन निदेशालय को सौंप दिया।

प्रदेश सरकार ने इंडियन टेक्नोमैक

कंपनी के घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय को मामले में उचित कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। निर्देश हैं कि इस मामले में आबकारी कराधान विभाग के अधिकारियों व पुलिस विभाग के जिन भी अधिकारियों ने लापरवाही की है, उनके खिलाफ भी उचित कार्रवाई अमल में लाई जाए।

-जीडी ठाकुर, सहायक आयुक्त आबकारी एवं कराधान विभाग सिरमौर

इंडियन टेक्नोमैक कंपनी को नीलाम करने के लिए हुई वेल्यूएशन आबकारी एवं कराधान विभाग सिरमौर ने इंडियन टेक्नोमैक कंपनी को नीलाम करने के लिए उसकी वेल्यूएशन हिमसवान से करवा ली है। जो कि करीब 350 सौ करोड़ के आसपास की है। कंपनी की नीलामी से मिलने वाली हिस्सेदारी के लिए आयकर विभाग, बैंक, श्रम विभाग, बिजली बोर्ड सहित कई विभाग हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। 

ताकि उन्हें भी नीलामी में से उनका हिस्सा दिया जाए। अब देखना है कि हाईकोर्ट मामले में आगामी क्या निर्देश देता है। किस-किस विभाग को नीलामी के बाद कितनी प्रतिशत हिस्सेदारी मिलेगी। साथ ही शेष राशि को विभाग कहां से पूरा करेंगे, यह सबसे बड़ा प्रश्न विभागों के सामने है।

Posted By: Babita