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लाहुल में हिमालयी क्षेत्र की स्वास्थ्य चुनौतियों पर होगा शोध, जवानों को मिलेगी मदद; ICMR केंद्र का शिलान्यास

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 12 Oct 2026 02:49 PM (IST)Updated: Mon, 12 Oct 2026 03:29 PM (IST)

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लाहुल स्पीति के केलंग में आईसीएमआर केंद्र का शिलान्यास किया। यह केंद्र हिमालयी क्षेत्र ...और पढ़ें

लाहुल के केलंग में आईसीएमआर सेंटर का शिलान्यास करते केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा व अन्य।

लाहुल के केलंग में आईसीएमआर सेंटर का शिलान्यास करते केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा व अन्य।

HighLights

  1. केलंग में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने आईसीएमआर केंद्र का शिलान्यास किया।

  2. यह केंद्र हिमालयी स्वास्थ्य चुनौतियों और औषधीय पौधों पर शोध करेगा।

  3. सेना के जवानों के लिए भी यह केंद्र अत्यंत उपयोगी साबित होगा।

जागरण संवाददाता, केलंग। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लाहुल स्पीति जिले के केलंग में आईसीएमआर केंद्र का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने परिसर में हिमालयी औषधीय पौधों का रोपण भी किया। केंद्रीय मंत्री ने इसके बाद वहां आयोजित वैज्ञानिक प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं अवलोकन किया। प्रदर्शनी में हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले दुर्लभ औषधीय पौधों, जैव विविधता और स्वास्थ्य अनुसंधान से जुड़े मॉडल प्रदर्शित किए गए थे। वैज्ञानिकों ने नड्डा को केंद्र की भावी योजनाओं और शोध कार्यों के बारे में जानकारी दी।

हिमालयी क्षेत्र की स्वास्थ्य चुनौतियों पर होगा शोध

जनता को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि यह आईसीएमआर केंद्र हिमालयी क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा। यहां उच्च हिमालयी क्षेत्र की स्वास्थ्य चुनौतियों, औषधीय पौधों पर शोध और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर अत्याधुनिक अनुसंधान होगा।

युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का लक्ष्य स्वास्थ्य अनुसंधान को गांव-गांव तक पहुंचाना है और हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इस केंद्र से युवाओं को रोजगार और शोध के नए अवसर भी मिलेंगे।

सेना के जवानों के लिए भी उपयोगी

उन्होंने कहा कि लाहुल-स्पीति के मुख्यालय केलंग में स्थापित होने जा रहा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद का उच्च-ऊंचाई चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र सीमावर्ती और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सशस्त्र बलों और सेना के जवानों के लिए वरदान साबित होगा।

शारीरिक बदलावों पर शोध करेगा संस्थान

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह केंद्र देश की सुरक्षा में लगे जवानों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह केंद्र सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि जवानों के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधा विकसित की जा सके। 

यह केंद्र अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जवानों के शरीर में होने वाले शारीरिक बदलावों और अनुकूलन पर गहन शोध करेगा, जिससे हाई एल्टीट्यूड सिकनेस जैसी समस्याओं का समाधान मिलेगा।

स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने में भी करेगा मदद

यह केंद्र पर्वतीय चिकित्सा, कठिन जलवायु और आपदा की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद करेगा, जो लाहुल-स्पीति जैसे क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस केंद्र में टेलीमेडिसिन, ड्रोन-आधारित हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स और डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। इससे दूर-दराज की चौकियों और दुर्गम इलाकों में दवाओं और राहत पहुंचाना आसान होगा।

रक्षा राज्य मंत्री भी पहुंचे

इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, सांसद कंगना रनौत, पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर, पूर्व विधायक रवि ठाकुर और विज्ञानी मौजूद रहे।

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