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HRTC की ई-बसों में रात को सफर जोखिमभरा, तीखे मोड़ पर बिखर रही हेडलाइट की बीम; चालकों ने बताई कमियां

By Parkash Bhardwaj Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sun, 27 Sep 2026 05:46 PM (IST)

हिमाचल पथ परिवहन निगम की नई इलेक्ट्रिक बसों में रात के समय हेडलाइट के फोकस की तकनीकी समस्या सामने आई ...और पढ़ें

एचआरटीसी की इलेक्ट्रिक बस। प्रतीकात्मक फोटो

एचआरटीसी की इलेक्ट्रिक बस। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. ई-बसों की हेडलाइट रात में सड़क पर केंद्रित नहीं हो रही।

  2. पहाड़ी सड़कों पर चालकों को स्टीयरिंग संभालने में दिक्कत आ रही।

  3. सुरक्षा जोखिम के बावजूद तकनीकी स्टाफ की कमी बनी हुई है।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के बेड़े में आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल सफर के दावे के साथ शामिल की गईं नई इलेक्ट्रिक बसें अब हेडलाइट के फोकस की तकनीकी समस्या से जूझ रही हैं। पहाड़ की संकरी सड़कों और तीखे मोड़ों पर रात में हेडलाइट की रोशनी सड़क पर केंद्रित होने के बजाय इधर-उधर बिखर रही है। इससे चालकों को स्टीयरिंग संभालने में परेशानी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।

ई-बस चालकों के अनुसार, हिमाचल में रात के समय अधिकांश पहाड़ी व ग्रामीण सड़कों पर स्ट्रीट लाइट नहीं होती। ऐसे में हेडलाइट ही चालक की आंखें हैं।

तीखे मोड़ पर मुश्किल

बीम का अलाइनमेंट सही न होने से तीखे मोड़, सामने से आने वाले वाहन और सड़क किनारे गहरी खाई का किनारा समय पर नजर नहीं आता। चालकों को प्रतिदिन औसतन 150 किलोमीटर बस चलानी होती है, ऐसे में हेडलाइट जैसी छोटी तकनीकी चूक भी सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम बन सकती है।

297 बसें; 800 रुपये प्रतिदिन मेंटेनेंस, स्टाफ अधूरा

एचआरटीसी के बेड़े में ओलेक्ट्रा कंपनी की करीब 297 इलेक्ट्रिक बसें हैं। अनुबंध के तहत संचालन और नियमित मेंटेनेंस के लिए निगम कंपनी को प्रति बस करीब 800 रुपये प्रतिदिन भुगतान कर रहा है। इसके बावजूद डिपो स्तर पर कंपनी का तकनीकी ढांचा पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। बड़े तकनीकी फॉल्ट भले सामने नहीं आ रहे, लेकिन हेडलाइट एडजस्टमेंट जैसी जरूरी समस्या के लिए भी पर्याप्त आटो-इलेक्ट्रिशियन उपलब्ध नहीं हैं। टायरमैन समेत अन्य तकनीकी स्टाफ की तैनाती भी धीमी है।

लोकल रूटों पर रात के फेरे सबसे ज्यादा संवेदनशील

अधिकांश इलेक्ट्रिक बसें जिला मुख्यालयों से जुड़े उपनगरीय और ग्रामीण लोकल रूटों पर चल रही हैं। इनमें देर शाम और रात के फेरे भी शामिल हैं। संकरी कच्ची-पक्की सड़कों, तीखे मोड़ों और आवारा मवेशियों के बीच हेडलाइट की खामी यात्रियों और चालकों की सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर सकती है।

प्रबंधन बोला, सभी बसों में सामने नहीं आई समस्या

एचआरटीसी प्रबंधन के अनुसार, हेडलाइट की समस्या सभी 297 बसों में नहीं, बल्कि कुछ सीमित रूटों की बसों में सामने आई है। इसलिए इसे पूरी व्यवस्था की नाकामी नहीं माना जा सकता। प्रबंधन का कहना है कि ओलेक्ट्रा कंपनी तकनीकी स्टाफ बढ़ा रही है। योग्य इलेक्ट्रिशियन की तैनाती होते ही हेडलाइट अलाइनमेंट की समस्या को प्राथमिकता से ठीक किया जाएगा।

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