HRTC ने 3 साल में बंद किए घाटे में चल रहे 282 बस रूट पर घाटा नहीं हुआ कम, कब कितना नुकसान हुआ?
हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) ने घाटे के कारण 282 बस रूट बंद कर दिए हैं, जिनमें 196 ग्रामीण रूट ...और पढ़ें

एचआरटीसी घाटे के रूट बंद करने के बावजूद भी नहीं उभर पाया है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
HRTC ने घाटे के कारण 282 बस रूट बंद किए।
निगम का संचित घाटा 2272 करोड़ रुपये तक पहुंचा।
वित्तीय सुधार के लिए 13 सूत्रीय योजना और ई-बसें।
अनिल ठाकुर, शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के बढ़ते घाटे का असर अब गांवों की परिवहन व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। एचआरटीसी को घाटे से उबारने के लिए उन रूट को बंद करने का निर्णय लिया गया था, जिनसे कमाई नहीं हो रही थी। तीन वर्ष में एचआरटीसी ने 282 रूट बंद कर दिए। इनमें 196 रूट ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के हैं।
इससे एचआरटीसी घाटे से तो नहीं उबर पाया, लेकिन उन क्षेत्रों के लोगों की मुश्किल जरूर बढ़ गई जहां सार्वजनिक परिवहन ही आवागमन का प्रमुख साधन है। इसी अवधि में 15 अन्य बस रूट की सेवाओं में भी कटौती की गई है।
2272 करोड़ पहुंचा संचित घाटा
एचआरटीसी का संचित घाटा 31 मार्च 2025 तक 2272.24 करोड़ रुपये पहुंच चुका है। सरकार के अनुसार रूट का युक्तीकरण, संसाधनों की कमी और पर्याप्त यात्री न मिलना रूट बंद करने के प्रमुख कारण हैं। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में रूट बंद होने से परिवहन सुविधा को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
कब कितना घाटा हुआ
एचआरटीसी को वर्ष 2022-23 में 259.02 करोड़ रुपये, 2023-24 में 152.89 करोड़ और 2024-25 में 153.21 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। तीन वर्ष में निगम का शुद्ध घाटा 565 करोड़ रुपये से अधिक रहा। वर्ष 2025-26 का बैलेंस शीट विवरण अभी तैयार किया जा रहा है। इस साल की बैलैंस शीट वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद तैयार की जाएगी।
बंद रूट अब निजी ऑपरेटर के हवाले
एचआरटीसी की ओर से बंद किए गए कई रूट निजी बस आपरेटरों को देने की प्रक्रिया में हैं। सरकार ने इसके लिए नई योजना शुरू की है, जिसके तहत निजी आपरेटरों को बस खरीदने के लिए अनुदान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य बंद या कम व्यवहार्य रूट पर परिवहन सुविधा बनाए रखना और निगम पर वित्तीय बोझ कम करना है। निगम खुद भी एक हजार ई-बसें लेगा। सरकार के पास इसकी फाइल है। वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
घाटा कम करने को 13 सूत्रीय प्लान
सरकार ने निगम की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए 13 सूत्रीय कार्ययोजना तैयार की है। इसमें रूट और बस बेड़े का युक्तीकरण, इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देना, ईंधन दक्षता में सुधार, मानव संसाधन का युक्तीकरण, रखरखाव खर्च घटाना और गैर-किराया आय बढ़ाना शामिल है। निश्शुल्क एवं रियायती यात्रा की प्रतिपूर्ति समय पर हासिल करने तथा डिपोवार प्रदर्शन की निगरानी पर भी जोर है।
निगम को 297 ई-बसों से उम्मीद
एचआरटीसी के बेड़े में 297 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हो चुकी हैं। उम्मीद है कि ई-बसों से डीजल की खपत और रखरखाव खर्च में कमी आएगी। इन बसों की खरीद के लिए निगम ने ऋण लिया है, जिसकी भरपाई भी करनी है। अब निगम यह आकलन कर रहा है कि ई-बसों के संचालन से आय में कितना इजाफा हुआ है और परिचालन खर्च में कितनी बचत हुई है।
एचआरटीसी को घाटे से उबारने के लिए कार्य किया जा रहा है। निगम की बसें रोजाना लाखों लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने का काम करती हैं।
-मुकेश अग्निहोत्री, उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री।
यह भी पढ़ें: हिमाचल शिक्षा बोर्ड ने TET का शेड्यूल किया जारी, देरी से आवेदन पर लगेगा 600 रुपये विलंब शुल्क
