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हिमाचल बिजली बोर्ड में नया सिस्टम लागू करने की तैयारी, सर्वे के बाद होगा फैसला; 28 लाख उपभोक्ताओं की नजर

By Rohit Nagpal Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 09 Sep 2026 06:19 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड अपने मौजूदा एसएपी-ईआरपी और आइएसयू बिलिंग सिस्टम की समीक्षा कर रहा है। जिससे 28 लाख उपभोक्ताओं की बिलिंग प्रभावित न हो।

हिमाचल बिजली बोर्ड में नया सिस्टम लगाने के लिए सर्वे होगा। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल बिजली बोर्ड में नया सिस्टम लगाने के लिए सर्वे होगा। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. बिजली बोर्ड मौजूदा बिलिंग सिस्टम की समीक्षा करेगा।

  2. 28 लाख उपभोक्ताओं की बिलिंग व्यवस्था पर असर।

  3. भविष्य की जरूरतों के लिए नए सिस्टम का आकलन।

जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड में ऑनलाइन कामकाज के लिए इस्तेमाल हो रहे एसएपी-ईआरपी और आइएसयू बिलिंग साल्यूशन को लेकर अब नए सिरे से मंथन शुरू हो गया है। मौजूदा सिस्टम को संचालित करने वाली कंपनी के साथ करार की अवधि पूरी होने से पहले ही यह आकलन होगा कि इसी सिस्टम को आगे जारी रखा जाए या किसी नए और आधुनिक ईआरपी सिस्टम पर शिफ्ट किया जाए। इसके लिए बोर्ड ने मौजूदा व्यवस्था का अध्ययन, मूल्यांकन और व्यापक समीक्षा करवाने का फैसला लिया है। 

बोर्ड ने इस काम के लिए कंपनियों से आवेदन मांगे हैं। इसके लिए पहले एक सितंबर तक आवेदन करने की समयसीमा तय की थी, इसे अब 14 सितंबर कर बढ़ा दिया है। सात सितंबर को जारी करेक्शनडम में बोर्ड ने समयसीमा बढ़ाने की जानकारी दी है। 

सिस्टम के माध्यम से बिजली बोर्ड के विभिन्न आनलाइन कामकाज को संचालित किया जाता है। इसमें वित्तीय कार्य, खरीद, स्टोर, कर्मचारियों से जुड़े काम और अन्य विभागीय प्रक्रियाओं के साथ बिजली उपभोक्ताओं की बिलिंग व्यवस्था की निगरानी और प्रबंधन भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

28 लाख उपभोक्ताओं की होती है बिलिंग 

बिजली बोर्ड प्रदेशभर में करीब 28 लाख उपभोक्ताओं की हर महीने बिलिंग करता है। ऐसे में बिल तैयार करने से लेकर बिलिंग प्रक्रिया की निगरानी और संबंधित डाटा के प्रबंधन तक आइटी सिस्टम की भूमिका महत्वपूर्ण है। सिस्टम में तकनीकी दिक्कत का असर उपभोक्ताओं की बिलिंग और बोर्ड के कामकाज पर पड़ सकता है।

भविष्य की जरूरतों का होगा आकलन

सर्वे के दौरान मौजूदा एसएपी-ईआरपी और आइएसयू बिलिंग साल्यूशन की कार्यक्षमता, कमियों और भविष्य की जरूरतों का आकलन किया जाएगा। इसके बाद बोर्ड को फ्यूचर रेडी ईआरपी सिस्टम के लिए रोडमैप सुझाया जाएगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि मौजूदा व्यवस्था को अपग्रेड कर आगे चलाया जाए या बोर्ड पूरी तरह नए सिस्टम पर जाए।

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