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धर्मशाला में केंद्रीय विवि निर्माण में देरी पर हिमाचल हाई कोर्ट का संज्ञान, शिक्षा सचिव को पेश होने का आदेश

By Rohit Sharma Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 03 Nov 2026 04:17 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने धर्मशाला केंद्रीय विश्वविद्यालय कैंपस निर्माण में देरी और वन क्लीयरेंस के 30 करोड़ रुपये के विवाद पर कड़ा रुख अपनाया है।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने धर्मशाला केंद्रीय विवि मामले में कड़ा रुख अपनाया।

  2. शिक्षा सचिव को 3 दिसंबर 2026 को व्यक्तिगत पेशी का आदेश।

  3. वन क्लीयरेंस के 30 करोड़ रुपये पर फंसा है पेच।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के धर्मशाला (उत्तरी) कैंपस के निर्माण और फॉरेस्ट क्लीयरेंस से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने शिक्षा सचिव को मामले की अगली सुनवाई पर अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश जारी किया है। 

30 करोड़ पर फंसा है पेच

यह आदेश अतुल भारद्वाज द्वारा दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया। धर्मशाला कैंपस के लिए 64.2016 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) और निर्माण कार्य शुरू करने के लिए 30,03,94,254 रुपये की राशि जमा की जानी है।

वित्तीय संकट का दिया हवाला

शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि राज्य गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है, इसलिए यह राशि केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा वहन की जानी चाहिए।

यूजर एजेंसी को देनी है रकम

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस राशि को जमा करने की जिम्मेदारी 'यूजर एजेंसी' यानी केंद्रीय विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार की है। हालांकि, केंद्र सरकार की पुरानी शर्तों के अनुसार राज्य सरकार को यह जमीन सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्त सौंपनी थी।

सुविधा अनुसार विरोधाभासी रुख अपना रही सरकार

केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने धर्मशाला कैंपस के पास गग्गल एयरपोर्ट के विस्तार के लिए काफी पैसा खर्च किया है, लेकिन अब विश्वविद्यालय कैंपस के लिए जरूरी फंड जारी करने से पीछे हट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अपनी सुविधा के अनुसार विरोधाभासी रुख अपना रही है।

हाई कोर्ट इस मामले पर अब 3 दिसंबर 2026 को सुनवाई करेगा, जिसमें शिक्षा सचिव को खुद हाजिर रहना होगा।

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