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कर्मचारियों को एकमुश्त एरियर भुगतान में भेदभाव पर हिमाचल हाई कोर्ट सख्त, शिक्षा विभाग से मांगी रिपोर्ट

By Chaitanya Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 13 Oct 2026 04:51 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने 'मोहित शर्मा बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य' मामले में कर्मचारियों के एरियर भुगतान में शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे भेदभाव पर कड़ा रुख अपनाया है।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने एरियर भुगतान भेदभाव पर कड़ा रुख अपनाया।

  2. शिक्षा विभाग को एकमुश्त भुगतान पर स्पष्टीकरण देने को कहा।

  3. 'मोहित शर्मा' फैसले के लाभ में समानता पर जोर।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने 'मोहित शर्मा बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य' मामले में आए फैसले को राज्य के विभिन्न विभागों में समान रूप से लागू करने और कर्मचारियों के एरियर (बकाया राशि) के भुगतान में हो रहे भेदभाव को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। शिक्षा विभाग में किस्तों में भुगतान पर सवाल उठ रहे हैं। 

न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जहां राज्य के कई अन्य विभागों में 'मोहित शर्मा' फैसले के तहत मिलने वाले एरियर का भुगतान कर्मचारियों को एकमुश्त कर दिया गया है, वहीं शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को यह भुगतान किस्तों में देकर उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।

रिकॉर्ड पर जानकारी प्रस्तुत करें 

इस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने उत्तरदाताओं (राज्य सरकार और शिक्षा विभाग) को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वे रिकॉर्ड पर यह जानकारी प्रस्तुत करें कि शिक्षा विभाग में ऐसे कितने मामले हैं जहां कर्मचारियों के इस एरियर को एकमुश्त जारी किया जा चुका है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2026 को तय की है।

कॉर्पोरेशन और अन्य विभागों में भी वापस लेने पड़े थे गलत आदेश

'मोहित शर्मा' फैसले की महत्ता और व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इससे जुड़े अन्य मामलों में भी कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद विभागों को अपने फैसले बदलने पड़े हैं। इससे पहले नितिभा सिंह बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में भी एक कॉर्पोरेशन ने वित्त विभाग की अधिसूचनाओं का हवाला देकर कर्मचारी को उच्च वेतनमान और मोहित शर्मा फैसले के लाभ देने से इनकार कर दिया था।

हालांकि, अदालत की सख्ती के बाद कॉर्पोरेशन को अपना वह इनकार करने वाला आदेश वापस लेना पड़ा था और कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर 'मोहित शर्मा' केस के आलोक में कर्मचारी के मामले पर विचार कर उचित आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे।

कानूनी पेचीदगियों और कोर्ट की निगरानी में मामला

दरअसल, प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा 29 नवंबर 2024 को 'मोहित शर्मा एवं अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य व अन्य' मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया गया था। इस फैसले के बाद प्रदेश के विभिन्न विभागों के कर्मचारी अपने उच्च वेतनमान के निर्धारण और एरियर के भुगतान की मांग कर रहे हैं। लेकिन अलग-अलग विभागों द्वारा इसे लागू करने में अपनाए जा रहे अलग-अलग रवैये और एरियर को किस्तों में बांटने की नीति के कारण अब यह मामला पूरी तरह से कानूनी पेचीदगियों और कोर्ट की निगरानी में आ चुका है।

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