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मैटरनिटी लीव मांगी तो नौकरी से निकाल दी महिला वैज्ञानिक, हिमाचल हाई कोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख; सेवा बहाली का आदेश

By Rohit Nagpal Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 12 Oct 2026 04:11 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एक गर्भवती महिला वैज्ञानिक को मातृत्व अवकाश मांगने पर नौकरी से बर्खास्त करने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला परिसर। जारगण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला परिसर। जारगण आर्काइव

HighLights

  1. गर्भवती वैज्ञानिक को मातृत्व अवकाश पर नौकरी से निकाला।

  2. हिमाचल हाई कोर्ट ने सेवा समाप्ति पर रोक लगाई।

  3. कोर्ट ने तत्काल पद पर बहाल करने का आदेश दिया।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एक गर्भवती महिला वैज्ञानिक को मातृत्व लाभ का दावा करने के तुरंत बाद नौकरी से बर्खास्त करने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने महिला वैज्ञानिक की सेवा समाप्ति के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए उन्हें तुरंत पद पर बहाल करने और काम जारी रखने के निर्देश दिए हैं। यह राहत याचिकाकर्ता डॉ. आईना शर्मा की ओर से दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने प्रदान की है।

कोर्ट ने केंद्र व अन्य उत्तरदाताओं को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को तय की है। 

साइंटिस्ट पद पर किया था नियुक्त

डॉ. आईना शर्मा को 14 मार्च 2024 को जारी एक विज्ञापन के तहत केंद्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग द्वारा वित्त पोषित 'वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी' योजना में साइंटिस्ट-बी (मेडिकल) के पद पर नियुक्त किया गया था। शुरुआत में यह नियुक्ति एक वर्ष के लिए थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दिया गया था। 

तीन दिन बाद सेवाएं समाप्त

याचिकाकर्ता ने 4 अगस्त 2026 को विभाग में मातृत्व लाभ के लिए आवेदन किया। इसके ठीक तीन दिन बाद, यानी 7 अगस्त 2026 को विभाग ने एक आदेश जारी कर उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं।

विभाग ने सेवा समाप्ति के पीछे 16वें वित्त आयोग की अवधि (2026-27 से 2030-31) के दौरान संशोधित वीआरडीएल योजना के नए स्टाफिंग पैटर्न को लागू करने का हवाला दिया था। 

याचिकाकर्ता ने दी दलील

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दलील दी कि विभाग एक तरफ तो महिला वैज्ञानिक का अनुबंध 31 मार्च 2027 तक बढ़ा चुका था और दूसरी तरफ इस योजना को पूरी तरह बंद भी नहीं किया जा रहा है। सरकार केवल इसका नाम बदलकर नए सिरे से अनुबंध पर स्टाफ रखने का प्रस्ताव कर रही है। ऐसे में मैटरनिटी लीव मांगते ही सेवा से निकालना पूरी तरह से अवैध और भेदभावपूर्ण है।

सेवा समाप्ति के आदेश पर रोक

अदालत ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के तर्कों में दम पाते हुए सेवा समाप्ति के आदेश (दिनांक 07.08.2026) के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता डॉ. आईना शर्मा को उनके मूल नियुक्ति पत्र (24.07.2024) के तहत साइंटिस्ट-बी के पद पर काम जारी रखने की अनुमति दी जाए।

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