हिमाचल हाई कोर्ट ने HPU चासंलर के आदेश पर लगाई रोक, दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एचपीयू चांसलर के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें कुलपति के विदेश दौरे ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
एचपीयू चांसलर के आदेश पर हाई कोर्ट की रोक।
प्रति-कुलपति राजिंदर वर्मा अपने पद पर बने रहेंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एचपीयू के चांसलर (कुलाधिपति/राज्यपाल) की ओर से जारी उस कार्यालय आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत कुलपति के विदेशी दौरे के दौरान कार्यभार प्रति-कुलपति को न देकर अन्य अधिकारियों को सौंप दिया था। एचपीयू के कुलपति दो से 12 अक्टूबर तक विदेश दौरे पर हैं। उनकी अनुपस्थिति में यूनिवर्सिटी के चांसलर ने एक अक्टूबर, 2026 को आदेश जारी कर कुलपति की जिम्मेदारियां डीन आफ स्टडीज प्रोफेसर बीके शिवराम और रजिस्ट्रार ज्योति राणा को सौंप दीं। इस आदेश के खिलाफ विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर प्रोफेसर राजिंदर वर्मा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
न्यायाधीश संदीप शर्मा ने निर्देश दिया कि चांसलर का एक अक्टूबर को जारी कार्यालय आदेश (जिसमें कार्यभार दूसरों को सौंपा था) अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगा। याचिकाकर्ता प्रोफेसर राजिंदर वर्मा प्रति-कुलपति के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन उसी तरह करते रहेंगे।
इस आदेश से उपयुक्त प्राधिकारी को विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रविधानों के अनुसार नए प्रति-कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने में कोई बाधा नहीं होगी। अदालत ने प्रतिवादी विश्वविद्यालय प्रशासन को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का समय दिया है। मामले की सुनवाई चार नवंबर को होगी।
विश्वविद्यालय अधिनियम का उल्लंघन
याचिकाकर्ता राजिंदर वर्मा की ओर से दलील दी गई कि चांसलर का यह आदेश हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम, 1970 की धारा 12-बी का उल्लंघन है। इस धारा के अनुसार, कुलपति की अस्थायी अनुपस्थिति (जैसे छुट्टी या बीमारी) के दौरान प्रति-कुलपति ही उनके कर्तव्यों और शक्तियों का निर्वहन करेगा।
प्रति कुलपति पद पर बने रहेंगे
यद्यपि प्रोफेसर राजिंदर वर्मा का तीन साल का सामान्य कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन अधिनियम की धारा 12-डी(दो) के प्रविधानों के अनुसार, जब तक उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं हो जाती और वह कार्यभार नहीं संभाल लेता, तब तक वर्तमान प्रति-कुलपति अपने पद पर बने रहेंगे। चूंकि अभी तक किसी नए प्रति-कुलपति की नियुक्ति नहीं हुई है, इसलिए प्रोफेसर वर्मा ही इस पद पर कानूनी रूप से बने हुए हैं।
