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हिमाचल के अस्पतालों के लिए दवाओं की सप्लाई के टेंडर पर रोक, हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला; शर्तों पर उठाए सवाल

By Rohit Sharma Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 27 Oct 2026 04:01 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने अस्पतालों के लिए दवाओं की आपूर्ति के एक बड़े टेंडर पर रोक लगा दी है। ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने दवा आपूर्ति टेंडर पर लगाई रोक।

  2. स्थानीय MSME को बाहर करने वाली शर्तों पर सवाल।

  3. सरकार पुराने सप्लायरों से दवा खरीद जारी रखेगी।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से अस्पतालों के लिए दवाओं और ड्रग्स की आपूर्ति के लिए निकाले गए एक बड़े टेंडर पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सरकार इस टेंडर प्रक्रिया के तहत फिलहाल किसी को भी कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं करेगी। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने मैसर्स मार्क लेबोरेटरीज लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर यह अंतरिम आदेश पारित किया।

टेंडर की शर्तों पर सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया था कि टेंडर की शर्तें जानबूझकर इस तरह बनाई गई हैं, ताकि हिमाचल प्रदेश के स्थानीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को इस रेस से बाहर किया जा सके। 
याचिकाकर्ता ने बताया कि सरकार ने 1403 दवाओं की सप्लाई के लिए न्यूनतम सालाना टर्नओवर की शर्त को बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये कर दिया है। 

इससे पहले, फरवरी-मार्च 2026 के टेंडर में यह शर्त सिर्फ 20 करोड़ रुपये थी और अक्टूबर 2024 में हिमाचल के स्थानीय निर्माताओं के लिए इसे घटाकर 10 करोड़ रुपये किया गया था। कोर्ट में दलील दी गई कि टेंडर में ऐसी कोई शर्त नहीं है कि सभी 1403 दवाएं किसी एक ही बड़े निर्माता द्वारा सप्लाई की जानी अनिवार्य हों।

नई शर्त के कारण बाहर हुई कंपनी

याचिकाकर्ता कंपनी का टर्नओवर 189.89 रुपये करोड़ है और वह पहले भी सरकार को 19 तरह की दवाएं सफलतापूर्वक सप्लाई कर चुकी है, लेकिन इस 500 करोड़ रुपये की नई शर्त के कारण वे इस बार बाहर हो गए। चूंकि मामला संवेदनशील है और अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई रुकनी नहीं चाहिए, इसलिए हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि राज्य सरकार अगले आदेश तक पुराने बिडर्स (सप्लायर्स) से ही दवाओं की खरीद जारी रख सकती है।

अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है और मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 तय की है।

 

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