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'मेरिट में आए आरक्षित उम्मीदवारों को जनरल कैटेगरी में ट्रांसफर कों', हिमाचल हाई कोर्ट का आदेश

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 27 Oct 2026 01:45 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि योग्यता के आधार पर सामान्य श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक अंक पाने ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला परिसर। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. आरक्षित उम्मीदवार मेरिट पर सामान्य श्रेणी में समायोजित होंगे।

  2. योग्यता को हमेशा प्राथमिकता दी जानी चाहिए, कोर्ट का आदेश।

  3. टीजीटी भर्ती मामले में याचिकाकर्ता को नियुक्ति का निर्देश।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी भर्तियों में आरक्षण नियमों को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि एससी (बीपीएल) श्रेणी का कोई उम्मीदवार योग्यता (मेरिट) के बल पर सामान्य श्रेणी के कट-आफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे सामान्य श्रेणी की सीटों पर समायोजित किया जाना चाहिए। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने कृष्णा कुमारी द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्णय दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि चाहे आरक्षण वर्टिकल (उर्ध्वाधर) हो या हारिजांटल (क्षैतिज) योग्यता को हमेशा प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी भी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार के अंक सामान्य वर्ग के आखिरी चुने गए उम्मीदवार से अधिक हैं, तो वह सामान्य सीट का हकदार है।

चयन आयोग को आदेश जारी

कोर्ट ने चयन आयोग को आदेश दिया कि मेरिट सूची में क्रम संख्या 51 और 97 पर मौजूद दो प्रतिभावान एससी (बीपीएल) उम्मीदवारों को तुरंत सामान्य श्रेणी में ट्रांसफर किया जाए। इस शिफ्टिंग के कारण एससी (बीपीएल) श्रेणी में खाली होने वाले पदों पर वेटिंग लिस्ट में शीर्ष पर बैठी याचिकाकर्ता कृष्णा कुमारी को मेरिट सूची में शामिल कर नियुक्ति दी जाए।

टीजीटी नियुक्ति से जुड़ा मामला

राज्य चयन आयोग ने 27 मई 2025 को ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर आर्ट्स के 425 पदों के लिए आवेदन मांगे थे। इसमें सामान्य श्रेणी के लिए 151 पद और एससी श्रेणी के लिए 17 पद आरक्षित थे। याचिकाकर्ता कृष्णा कुमारी ने एससी (बीपीएल) श्रेणी में परीक्षा दी थी। अंतिम परिणाम में वह 64 अंक के साथ इस श्रेणी की वेटिंग लिस्ट में पहले स्थान पर रहीं। 

मेरिट सूची में एससी (बीपीएल) श्रेणी के तीन उम्मीदवारों ने क्रमशः 75.24, 73.06 और 71.86 अंक प्राप्त किए थे, जो सामान्य श्रेणी के कट-आफ (67.61 अंक) से कहीं अधिक थे। इसके बावजूद चयन आयोग ने उन्हें सामान्य श्रेणी में भेजने के बजाय एससी (बीपीएल) की आरक्षित 17 सीटों पर ही एडजस्ट कर दिया। इस कारण वेटिंग लिस्ट में सबसे ऊपर होने के बाद भी याचिकाकर्ता का चयन नहीं हो पाया। 

आयोग का तर्क खारिज

चयन आयोग ने दलील दी थी कि कार्मिक विभाग के 12 नवंबर 2014 के निर्देश के अनुसार, हारिजांटल (क्षैतिज) आरक्षण श्रेणियों पर ओन मेरिट का सिद्धांत लागू नहीं होता। हाई कोर्ट ने आयोग के इस तर्क को खारिज कर दिया। 

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