शिमला एयरपोर्ट रोड में अतिक्रमण पर हाई कोर्ट सख्त, हिमाचल सरकार को तुरंत कब्जे हटाने के दिए निर्देश
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला एयरपोर्ट जाने वाली मुख्य सड़क पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर कड़ा संज्ञान लिया ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
हाई कोर्ट ने शिमला एयरपोर्ट रोड अतिक्रमण पर संज्ञान लिया।
राज्य सरकार को सभी अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए।
लोक निर्माण विभाग की कथित लापरवाही पर भी सवाल उठे।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला एयरपोर्ट जाने वाली मुख्य सड़क के दोनों किनारों पर हो रहे अवैध निर्माणों और अतिक्रमण पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने इस मामले में लोक निर्माण विभाग की कथित लापरवाही को देखते हुए दर्ज जनहित याचिका कि सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार को सभी अवैध कब्जों को हटाने के सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ के समक्ष इस जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।
इस जनहित याचिका की शुरुआत हाई कोर्ट को मिले एक शिकायती पत्र के बाद हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि शिमला एयरपोर्ट की तरफ जाने वाली सड़क के दोनों तरफ बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण हो रहे हैं और लोक निर्माण विभाग इस पर पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठा है।
दो प्रमुख मार्ग पर अतिक्रमण सामने आया
कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी और यह भी साफ करने को कहा था कि सड़क के केंद्र से निजी निर्माण के लिए न्यूनतम दूरी कितनी तय है। लोक निर्माण विभाग के शिमला चतुर्थ सर्कल के अधीक्षण अभियंता द्वारा कोर्ट में ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई, जिसमें दो प्रमुख मार्गों पर अतिक्रमण की बात सामने आई है।
मथोली मार्ग पर 3 कब्जे
फायल-रामपुरी वाया मथोली मार्ग के इस खंड पर तीन अवैध कब्जे पाए गए थे, जिनमें से दो को कब्जाधारियों ने खुद ही हटा लिया है। हालांकि, एक व्यक्ति (रूप राम) द्वारा कब्जा न हटाने पर विभाग ने उसे 19 सितंबर 2026 को नोटिस तामील कराया है।
जाठिया देवी में 5 अतिक्रमण
जाठिया देवी से रामपुरी मार्ग के इस मार्ग पर 5 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। इनमें से मैसर्स शांति और रूप राम ने अपने खर्च पर आंशिक रूप से कब्जे हटाए हैं, जबकि तीन अन्य कब्जाधारियों ने अपनी मौजूदगी में दोबारा पैमाइश की मांग करते हुए कब्जा नहीं हटाया है। इन्हें भी विभाग द्वारा नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
सुनवाई से पहले हटाने का निर्देश
खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई से पहले सभी बचे हुए अतिक्रमणों को हटाने के लिए प्रभावी और निर्णायक कदम उठाए जाएं। जनहित याचिका की अगली सुनवाई 7 दिसंबर 2026 को होगी।
