HRTC में पदोन्नति पर हिमाचल हाई कोर्ट हुआ सख्त, दो सप्ताह के भीतर डीपीसी पर फैसला करने का आदेश
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एचआरटीसी को डिविजनल मैनेजर पद पर पदोन्नति से जुड़े मामले में दो सप्ताह के भीतर ...और पढ़ें

हिमाचल हाई कोर्ट ने एचआरटीसी में पदोन्नति रुकने पर संज्ञान लिया है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
हाई कोर्ट ने एचआरटीसी को दो सप्ताह में डीपीसी पूरी करने को कहा।
वरिष्ठता विवाद के आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया नहीं रोकी जा सकती।
याचिकाकर्ता विशाल शर्मा की पदोन्नति पर जल्द निर्णय का आदेश।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एचआरटीसी में डिविजनल मैनेजर के पद पर पदोन्नति से जुड़े मामले में निगम को दो सप्ताह के भीतर विभागीय पदोन्नति समिति की कार्यवाही को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने स्पष्ट किया कि केवल वरिष्ठता विवाद लंबित होने के आधार पर पदोन्नति की प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता। कोर्ट ने एचआरटीसी को निर्देश दिए हैं कि 24 जून 2025 को हुई डीपीसी की बैठक के कार्यवृत्त पर 20 अक्तूबर 2026 तक निर्णय लिया जाए।
यदि डीपीसी ने याचिकाकर्ता विशाल शर्मा के नाम की डिविजनल मैनेजर (कॉमर्स) पद पर पदोन्नति के लिए सिफारिश की है तो निर्धारित अवधि में पदोन्नति आदेश भी जारी किया जाए।
मामले के अनुसार विशाल शर्मा ने 26 नवंबर 1996 को एचआरटीसी में क्लर्क के रूप में नौकरी शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने अधीनस्थ लेखा सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और 29 जून 2006 को सेक्शन ऑफिसर पद पर पदोन्नत हुए। 25 अप्रैल 2015 को उन्हें असिस्टेंट कंट्रोलर (वित्त एवं लेखा) और 26 सितंबर 2022 को डिप्टी कंट्रोलर (वित्त एवं लेखा) बनाया गया। आरएंडपी नियमों के अनुसार डिप्टी कंट्रोलर (वित्त एवं लेखा) से डिविजनल मैनेजर (कॉमर्स) के पद पर पदोन्नति का प्रविधान है।
याचिकाकर्ता का कहना था कि डिविजनल मैनेजर (कॉमर्स) का पद अक्तूबर 2024 में खाली हो गया था और उस समय तक वह आवश्यक दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके थे। 30 नवंबर 2024 की अंतिम वरिष्ठता सूची में भी उनका नाम डिप्टी कंट्रोलर (वित्त एवं लेखा) के रूप में पहले स्थान पर था।
डीपीसी हुई पर परिणाम पर नहीं हुआ फैसला
याचिकाकर्ता के अनुसार पद खाली होने के बावजूद पदोन्नति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई। इसके बाद 24 जून 2025 को डीपीसी की बैठक हुई, लेकिन उसकी सिफारिशों का परिणाम घोषित नहीं किया गया। इसको लेकर विशाल शर्मा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
जवाब दाखिल करने का अवसर दिया
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कई बार सरकार और निगम को जवाब दाखिल करने का अवसर दिया। एक सितंबर के आदेश में भी कोर्ट ने अंतिम अवसर देते हुए कहा था कि यदि डीपीसी का परिणाम घोषित करने में कोई बाधा नहीं है तो अगली तारीख तक परिणाम घोषित किया जाए। इसके बावजूद निगम की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया।
निगम ने बाद में कोर्ट को बताया कि डीपीसी की कार्यवाही अध्यक्ष की मंजूरी के लिए भेजी गई थी, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिली। पूरे मामले को कुछ अधिकारियों की ओर से उठाए गए अभ्यावेदन और अदालत में लंबित मामलों के मद्देनजर दोबारा जांचने के लिए वापस किया गया था।
