'भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेज त्रुटि सुधारने के लिए अतिरिक्त समय देना पूरी तरह वैध', हिमाचल हाई कोर्ट का निर्णय
हिमाचल हाई कोर्ट ने सरकारी भर्ती में दस्तावेज सत्यापन पर महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि उम्मीदवार ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
दस्तावेज में तकनीकी त्रुटि 'सुधारने योग्य त्रुटि' मानी जाएगी।
चयन आयोग त्रुटि सुधारने के लिए अतिरिक्त समय दे सकता है।
मामूली चूक के लिए उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द नहीं होगी।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी भर्तियों में दस्तावेज सत्यापन को लेकर एक बड़ा सिद्धांत स्पष्ट किया है। जस्टिस ज्योत्सना रिवाल दुआ ने निर्णय दिया कि यदि कोई उम्मीदवार विज्ञापन में मांगी गई आवश्यक योग्यता रखता है, लेकिन उसके प्रमाणपत्र में कोई तकनीकी त्रुटि या औपचारिकता (जैसे प्रतिहस्ताक्षर) छूट गई है, तो इसे 'सुधारने योग्य त्रुटि' माना जाएगा। चयन आयोग द्वारा ऐसी त्रुटियों को ठीक करने के लिए अतिरिक्त समय देना पूरी तरह वैध है।
हिमाचल राज्य चयन आयोग ने 4 मार्च 2024 को ग्रुप इंस्ट्रक्टर के 12 पदों के लिए आवेदन मांगे थे। नियमों के तहत उम्मीदवारों के पास आवश्यक व्यावहारिक अनुभव होना अनिवार्य था। विज्ञापन की चेकलिस्ट में यह शर्त थी कि अनुभव प्रमाणपत्र संबंधित सरकारी प्राधिकारी या विभाग के अधिकारी द्वारा सत्यापित/प्रतिहस्ताक्षरित होना चाहिए। दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान आयोग ने पाया कि उम्मीदवार प्रदीप के अनुभव प्रमाणपत्र पर लेबर ऑफिसर/इंस्पेक्टर के प्रतिहस्ताक्षर नहीं थे।
आयोग ने 3 मार्च 2026 को नोटिस जारी कर प्रदीप सहित अन्य उम्मीदवारों को यह कमी सुधारने के लिए 12 मार्च 2026 तक का समय दिया। प्रदीप ने इस अवधि में कमी को दूर कर लिया।
वेटिंग में बैठे अभ्यर्थी ने दायर की याचिका
वेटिंग लिस्ट में दूसरे स्थान पर मौजूद विशाल कुमार (याचिकाकर्ता) ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। उसका तर्क था कि ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि (26 मार्च 2024) बीत जाने के बाद आयोग किसी उम्मीदवार को प्रमाणपत्र दुरुस्त करने या नया प्रमाणपत्र जमा करने की अनुमति नहीं दे सकता, इसलिए प्रदीप की उम्मीदवारी रद की जाए।
चयन आयोग और सरकार ने रखा पक्ष
चयन आयोग और राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि 5 दिसंबर 2022 को संशोधित भर्ती एवं प्रोन्नति नियमों में अनुभव प्रमाणपत्र को किसी प्राधिकारी से प्रतिहस्ताक्षरित कराने की कोई वैधानिक शर्त नहीं थी। विज्ञापन की चेकलिस्ट में दी गई यह शर्त केवल एक सामान्य प्रक्रियात्मक औपचारिकता थी।
यह एक मामूली तकनीकी चूक
कोर्ट ने कहा कि प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी न होने से कोई नियुक्ति 'अनियमित' तो हो सकती है, लेकिन 'अवैध' नहीं। चूंकि उम्मीदवार के पास अंतिम तिथि से पहले का वास्तविक अनुभव था, इसलिए केवल प्रतिहस्ताक्षर न होना एक मामूली तकनीकी चूक थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार जब उम्मीदवार सभी चरणों को पार कर लेता है, तो उसकी उम्मीदवारी को तुच्छ या मामूली त्रुटियों के लिए रद नहीं किया जाना चाहिए।
