कॉरपोरेट सेक्टर के रिटायर्ड कर्मचारियों को भी मिलेगी संशोधित पेंशन, हिमाचल हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कॉरपोरेट सेक्टर के वे कर्मचारी जो पेंशन योजना के लागू रहने ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
कॉरपोरेट सेक्टर के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संशोधित पेंशन मिलेगी।
हाई कोर्ट ने फंड की कमी का तर्क खारिज किया।
पेंशन योजना 1999 के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारी हकदार।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि कॉरपोरेट सेक्टर के जो कर्मचारी पेंशन योजना के लागू रहने के दौरान सेवानिवृत्त हुए हैं, वे पेंशन संशोधन के पूर्ण हकदार हैं। घाटे या फंड की कमी का हवाला देकर कर्मचारियों को उनके इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने वन विकास निगम द्वारा दायर अपीलों को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।
वन विकास निगम के सेवानिवृत कर्मचारियों मस्तराम, हृदया राम और बियासन देवी का कहना था कि वे हिमाचल प्रदेश कॉरपोरेट सेक्टर कर्मचारी पेंशन योजना 1999 के प्रभावी रहने के दौरान (29 अक्टूबर 1999 से दो दिसंबर 2004 के बीच) सेवानिवृत्त हुए थे। इस पेंशन योजना को बाद में दिसंबर 2004 में सरकार ने निरस्त कर दिया था।
एकलपीठ ने दिया था पक्ष में आदेश
एकलपीठ ने 23 मई 2025 को इन कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें एक जनवरी 2016 से संशोधित पेंशन का लाभ देने का आदेश दिया था, जिसे वर्ष 2022 में लागू किया जाना था।
निगम ने दी चुनौती
एकलपीठ के इसी फैसले को वन विकास निगम ने खंडपीठ के समक्ष चुनौती देकर दलील दी थी कि निगम के पास इस संशोधन को लागू करने के लिए पर्याप्त वित्तीय फंड उपलब्ध नहीं है।
लाभ मिलना अनिवार्य
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने 1999 की कॉरपोरेट पेंशन योजना के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि इसके तहत कॉरपोरेट क्षेत्र के कर्मचारियों के पेंशन लाभ भी केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के प्रविधानों के तहत ही तय होते हैं, जिन्हें राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के लिए अपनाती है। इसलिए जब सरकार के कर्मचारियों के लिए पेंशन संशोधित की गई है, तो इन निगम कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलना अनिवार्य है।
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