नौणी यूनिवर्सिटी विवाद में सरकार का हस्तक्षेप: VC का आदेश पलटा, सिद्धार्थ ही रजिस्ट्रार; स्टाफ को निर्देश जारी
सरकार ने नौणी विश्वविद्यालय में कुलपति और रजिस्ट्रार के बीच चल रहे विवाद में हस्तक्षेप किया है। कार्यवाहक कुलपति द्वारा ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव
HighLights
सरकार ने नौणी विश्वविद्यालय कुलपति का आदेश पलटा।
सिद्धार्थ आचार्य को वैध रजिस्ट्रार घोषित किया गया।
सभी अधिकारियों को सहयोग करने के निर्देश दिए।
जागरण टीम, शिमला/सोलन। डा. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में कुलपति और रजिस्ट्रार के बीच चल रहे विवाद के बीच सरकार के हस्तक्षेप तक पहुंच गया है। कार्यवाहक कुलपति डा. एचएस बवेजा द्वारा रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य की शक्तियां छीनने और उनका कार्यभार विस्तार शिक्षा निदेशक डा. डीपी शर्मा को सौंपने के आदेश को प्रदेश सरकार ने पलट दिया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सिद्धार्थ आचार्य ही विश्वविद्यालय के वैध रजिस्ट्रार हैं और उन्हें रजिस्ट्रार के सभी वैधानिक, प्रशासनिक, वित्तीय और रिकार्ड संबंधी अधिकारों के साथ काम करने दिया जाए।
बागवानी विभाग के सचिव की ओर से मंगलवार को जारी कार्यालय आदेश में कहा गया है कि कुलपति का 5 अक्टूबर का आदेश कानून की वैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। सरकार ने आदेश को तत्काल प्रभाव से पलटते हुए उसे अप्रभावी और कानूनी प्रभाव से रहित करार दिया है। इसके साथ ही सारे मामले को लेकर लोकभवन को भी नियमों के तहत कार्यवाही के लिए लिखा है। इसके साथ ही प्रदेश पुलिस महानिदेशक को वहां की स्थिति के आधार पर उचित कदम उठाने को कहा है।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू द्वारा इस मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को इस संबंध में उचित कार्यवाही करने को कहा गया।
सरकार ने स्पष्ट की स्थिति
सरकार ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय कृषि, बागवानी एवं वानिकी अधिनियम, 1986 का हवाला देते हुए कहा कि धारा 30 के तहत रजिस्ट्रार विश्वविद्यालय का वैधानिक पद है। रजिस्ट्रार की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत होती है और वह सीनेट, बोर्ड आफ मैनेजमेंट तथा अकादमिक काउंसिल का पदेन सदस्य सचिव होता है। सबसे अहम आधार अधिनियम की धारा 25(7) को बनाया गया है।
सरकार के अनुसार, आपातकालीन परिस्थितियों में भी कुलपति को ऐसे पद पर किसी की नियुक्ति या पद से हटाने का अधिकार नहीं है। इसी प्रविधान के आधार पर सरकार ने कहा कि किसी आदेश को शक्तियां समाप्त करने का नाम देकर वैधानिक पद पर बैठे अधिकारी को प्रभावी रूप से हटाया नहीं जा सकता।
अधिकारियों व कर्मचारियों को आदेश
सरकार ने विश्वविद्यालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि सिद्धार्थ आचार्य को रजिस्ट्रार के वैध पदाधिकारी के रूप में मान्यता देते हुए उनके कामकाज में पूरा सहयोग करें। यदि 5 अक्टूबर के आदेश के बाद रजिस्ट्रार कार्यालय की फाइलें, रिकॉर्ड, रजिस्टर, मुहर, चाबियां अथवा अन्य सरकारी संपत्ति किसी अधिकारी ने अपने कब्जे में ली है तो उसे तत्काल सिद्धार्थ आचार्य को वापस करने के निर्देश दिए गए हैं।
डीपी शर्मा का अतिरिक्त कार्यभार भी खत्म
कुलपति के 5 अक्टूबर के आदेश में रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य की शक्तियां और कार्य समाप्त कर विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. डीपी शर्मा को रजिस्ट्रार का पूरा अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। सरकार ने इस व्यवस्था को भी निरस्त कर दिया है। अब डॉ. डीपी शर्मा केवल अपने मूल पद पर रहेंगे।
