हिमाचल में सरकारी नौकरियों में आरक्षण का अब नया फार्मूला, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश किया लागू
हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू कर दिया है। अब ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव
HighLights
सरकारी नौकरियों में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू।
आरक्षित वर्ग के मेरिटोरियस को अनारक्षित पद मिलेगा।
छूट लेने पर आरक्षित श्रेणी के पद पर ही समायोजन।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के तहत चयन को लेकर लंबे समय से चली आ रही ओन मेरिट यानी अपनी योग्यता व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को लागू कर दिया है। ऐसे में 2014 के आदेशों को रद कर नए सिरे से सरकारी नौकरियों को लेकर स्पष्ट कर दिया है।
कार्मिक विभाग ने वीरवार को जारी आदेश में साफ किया है कि अनुसूचित जाति यानी एससी, अनुसूचित जनजाति यानी एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी वर्ग, दिव्यांगजनों, पूर्व सैनिकों, स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों और बीपीएल वर्ग के ऐसे अभ्यर्थी, जिसने सामान्य अभ्यर्थियों के समान मानकों पर चयन हासिल किया है, उसे आरक्षित पद की अपेक्षा अनारक्षित पद पर समायोजित किया जाएगा। इससे आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित पदों पर अन्य पात्र अभ्यर्थियों के लिए अवसर सुरक्षित रहेंगे।
प्रधान सचिव कार्मिक एम सुधा देवी की तरफ से सभी प्रशासनिक सचिवों, मंडलायुक्तों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों तथा निगमों, बोर्डों और विश्वविद्यालयों के प्रमुखों को जारी आदेश में 2011 और 2014 में जारी निर्देशों को समेकित करते हुए स्थिति स्पष्ट की गई है।
छूट का लाभ लिया है तो चयन आरक्षित रिक्ति के विरुद्ध
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि एससी, एसटी या ओबीसी अभ्यर्थी ने चयन के दौरान आयु सीमा, अनुभव, शैक्षणिक योग्यता, परीक्षा में अनुमत अतिरिक्त अवसर या सामान्य वर्ग से अधिक बड़े जोन आफ कंसिडरेशन जैसी किसी छूट का लाभ लिया है, तो उसका चयन आरक्षित रिक्ति के विरुद्ध माना जाएगा। ऐसे अभ्यर्थी को अनारक्षित पद पर ओन मेरिट के आधार पर समायोजित नहीं किया जाएगा।
पूर्व सैनिक व पूर्व सैनिकों के आश्रित, स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रित, दिव्यांगजन, विशिष्ट खिलाड़ी तथा अंत्योदय और बीपीएल श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए भी यही सिद्धांत लागू होगा। बिना किसी छूट के पर्याप्त अंक हासिल करने वाला अभ्यर्थी मेरिट के आधार पर खुले या अनारक्षित क्षैतिज स्लाट में जाएगा।
छूट नहीं ली तो सामान्य वर्ग की सीट आपकी
यदि अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) या अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) व अन्य का कोई अभ्यर्थी आयु सीमा, अनुभव, शैक्षणिक योग्यता या लिखित परीक्षा के प्रयासों की संख्या में कोई छूट लिए बिना सामान्य वर्ग के समान अंकों और मानकों से पास होता है, तो उसे आरक्षित कोटे में नहीं बल्कि अनरिजर्व्ड (जनरल) सीट पर गिना जाएगा। हालांकि, यदि उसने किसी भी स्तर पर नियम में छूट ली है, तो वह केवल आरक्षित कोटे की सीट के लिए ही योग्य होगा।
