विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में नए जिले बनाने की तैयारी, सरकार ने आयोग का गठन किया; कांगड़ा, मंडी और शिमला पर नजर

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 14 Oct 2026 03:08 PM (IST)Updated: Wed, 14 Oct 2026 04:24 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश सरकार ने जिलों, उपमंडलों और अन्य प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए एक आयोग का गठन किया है। यह आयोग छह माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन हेतु आयोग का गठन।

  2. सेवानिवृत्त न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी आयोग के अध्यक्ष।

  3. कांगड़ा, मंडी और शिमला पर विशेष नजर रहेगी।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में जिलों, उपमंडलों, तहसीलों और विकास खंडों सहित विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए सरकार ने आयोग का गठन किया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। आयोग को छह माह के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। इसके आधार पर प्रदेश में नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन, मौजूदा इकाइयों के विलय और विभाजन पर निर्णय लिया जा सकेगा।

आयोग में ये शामिल

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी आयोग के अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। अधिवक्ता विशाल पंवार और सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी राजेश शर्मा को सदस्य बनाया गया है। भू-अभिलेख विभाग के निदेशक आयोग के सदस्य सचिव होंगे।

जनसुविधा और प्रशासनिक दक्षता पर रहेगा जोर

आयोग प्रदेश में जिलों, उपमंडलों, तहसीलों, उपतहसीलों, विकास खंडों और विभिन्न विभागों के अन्य मंडलों की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करेगा। जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों, आवागमन की सुविधा, प्रशासनिक दक्षता और लोगों की जरूरतों के आधार पर नई इकाइयां बनाने अथवा मौजूदा इकाइयों के पुनर्गठन की आवश्यकता का आकलन किया जाएगा। आयोग इस प्रक्रिया में जनप्रतिनिधियों, संबंधित विभागों और अन्य हितधारकों से भी विचार-विमर्श करेगा।

खर्च का भी होगा आकलन

नई प्रशासनिक इकाइयां स्थापित करने के लिए आवश्यक भवनों, आधारभूत ढांचे और कर्मचारियों पर होने वाले खर्च का आकलन भी किया जाएगा।

खर्च बढ़ाए बिना संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की सिफारिश

सरकार ने आयोग को मौजूदा कार्यालयों और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने के उपाय सुझाने का जिम्मा भी सौंपा है। इसका उद्देश्य राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ाए बिना प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।

शिमला में होगा आयोग का मुख्यालय

आयोग का मुख्यालय शिमला में होगा। राजस्व विभाग और संबंधित जिलों के उपायुक्त आयोग को आवश्यक दस्तावेज, जनसांख्यिकीय आंकड़े और सचिवालय संबंधी सहायता उपलब्ध करवाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग आयोग के लिए कार्यालय, कर्मचारी, वाहन और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाएगा। अध्यक्ष और सदस्यों को निर्धारित नियमों के अनुसार यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता और सरकार द्वारा तय मानदेय मिलेगा।

कांगड़ा, मंडी और शिमला पर नजर

यदि जिलों का पुनर्गठन होता है तो कांगड़ा, मंडी और शिमला पर नजर रहेगी। तीनों बड़े जिलों से नए डिस्ट्रिक्टस बनाए जा सकते हैं। आयोग की रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। 

जिलों की स्थिति

हिमाचल प्रदेश में अभी 12 जिले हैं। इनमें क्षेत्रफल के हिसाब से लाहुल-स्पीति सबसे बड़ा है व जनसंख्या में कांगड़ा। कांगड़ा में 15 विधानसभा क्षेत्र हैं, मंडी में 10 और शिमला में 8 हैं। ये तीन जिले ही जनसंख्या के लिहाज से बड़े हैं। 

15 पुलिस जिले

हिमाचल प्रदेश के 12 जिले हैं, लेकिन पुलिस जिले 15 हैं। कांगड़ा में नूरपुर और देहरा पुलिस जिला घोषित हैं, यहां पुलिस अधीक्षक बैठते हैं। इसके अलावा सोलन के बद्दी को भी पुलिस जिला बनाया 

यह भी पढ़ें: CM सुक्खू हिमाचल के शीत मरुस्थल काजा पहुंचे, 1 से 2 डिग्री तक तापमान; 12000 फीट की ऊंचाई पर जानेंगे जनसमस्याएं