विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में अब प्राइवेट स्कूल खोलना हुआ आसान, खेल मैदान के मानक भी बदले; दस्तावेज का बोझ भी घटेगा

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 14 Sep 2026 12:50 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश सरकार ने निजी स्कूल खोलने की राह आसान करते हुए खेल मैदान के न्यूनतम क्षेत्रफल के मानकों में ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में प्राइवेट स्कूल खोलने के नियम बदल दिए हैं। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल प्रदेश में प्राइवेट स्कूल खोलने के नियम बदल दिए हैं। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. खेल मैदान के न्यूनतम क्षेत्रफल के मानक संशोधित किए गए।

  2. निजी स्कूल खोलने की प्रक्रिया अब हुई काफी सरल।

  3. सरकारी मैदानों का भी उपयोग कर सकेंगे निजी स्कूल।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित जमीन को देखते हुए राज्य सरकार ने निजी स्कूल खोलने की राह आसान कर दी है। शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों के लिए खेल मैदान के न्यूनतम क्षेत्रफल के मानकों में संशोधन किया है। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। इससे खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में स्कूल खोलने के इच्छुक प्रबंधनों को राहत मिलने की उम्मीद है।

खेल मैदान का पैमाना बदला

अब प्री-प्राइमरी से पांचवीं तक स्कूल के लिए 500 वर्गमीटर, आठवीं और दसवीं तक 800 वर्गमीटर तथा जमा दो कक्षा तक के स्कूल के लिए 1000 वर्गमीटर खेल मैदान अनिवार्य होगा। जो पहले से आधा है। 

निदेशक ने जारी किए निर्देश

निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली ने सभी जिलों के उपनिदेशकों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने आरटीई अधिनियम, 2009 के तहत स्कूलों के पंजीकरण, नवीनीकरण और निजी स्कूलों में नौवीं से 12वीं कक्षा शुरू करने से जुड़े निर्देशों की समीक्षा के बाद यह बदलाव किया है।

सरकारी मैदान का भी कर सकेंगे उपयोग

स्कूल खोलने के प्रस्ताव के साथ खेल मैदान का पूरा ब्योरा देना होगा। जमीन मालिक के साथ मूल किराया समझौते की प्रति में खसरा नंबर और मैदान की लंबाई-चौड़ाई दर्ज होनी चाहिए। अपना मैदान नहीं होने पर नजदीकी सरकारी, नगर निकाय या पंचायत के खेल मैदान का उपयोग किया जा सकेगा। इसके लिए संबंधित प्राधिकरण या जमीन मालिक के साथ किराया अथवा साझा उपयोग का समझौता प्रस्तुत करना होगा।

दस्तावेजों का बोझ भी घटाया

सरकार निजी स्कूलों के पंजीकरण में अनावश्यक दस्तावेजों का बोझ भी घटा चुकी है। आरटीई अधिनियम, हिमाचल प्रदेश आरटीई नियम, 2025 और संबंधित कानूनों में अनिवार्य दस्तावेज ही जमा करने होंगे। इनमें फायर सेफ्टी, बिल्डिंग सेफ्टी प्रमाणपत्र, सोसायटी या ट्रस्ट पंजीकरण, पंजीकृत लीज एग्रीमेंट और खेल मैदान से जुड़े प्रमाणपत्र शामिल हैं।

गैर-अनिवार्य दस्तावेजों के स्थान पर स्व-प्रमाणित घोषणा या प्रतिज्ञा पत्र दिया जा सकेगा। गलत जानकारी या तथ्य छिपाने पर कानूनी कार्रवाई और पंजीकरण रद किया जा सकता है।

1162 निजी स्कूल एचपी बोर्ड से संबद्ध

प्रदेश में वर्तमान में 1162 निजी स्कूल हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध हैं। इनमें पांच स्कूलों ने सीबीएसई से संबद्धता के लिए बोर्ड से एनओसी ली है। स्कूलों की संबद्धता हर साल नवीनीकृत होती है। दस्तावेजों की जांच के बाद मौके पर भी सत्यापन किया जाता है।

यह भी पढ़ें: हमीरपुर में PG में रह रही छात्राओं से अश्लील हरकतें करता था अधेड़, वीडियो बनाकर पुलिस के पास पहुंची पीड़िताएं