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हिमकेयर घोटाला: विधायक डॉ. जनक के बाद हिमाचल विजिलेंस की तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव से भी पूछताछ की तैयारी

By Chaitanya Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 24 Aug 2026 06:46 AM (GMT+05:30)Updated: Mon, 24 Aug 2026 11:02 AM (GMT+05:30)

हिमकेयर योजना में वित्तीय अनियमितताओं की जांच अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गई है। विजिलेंस एसआईटी तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव से ...और पढ़ें

हिमकेयर घोटाले में हिमाचल विजिलेंस की जांच तेज हो गई है। प्रतीकात्मक फोटो

हिमकेयर घोटाले में हिमाचल विजिलेंस की जांच तेज हो गई है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. हिमकेयर अनियमितताओं की जांच प्रशासनिक स्तर तक पहुंची।

  2. तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव से पूछताछ की तैयारी में विजिलेंस।

  3. 71 निजी अस्पतालों के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में।

जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश में हिमकेयर योजना से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंचती दिखाई दे रही है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) की एसआइटी ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए योजना को चलाने, निजी अस्पतालों को पैनल में शामिल करने, क्लेम की जांच, भुगतान प्रक्रिया व आडिट व्यवस्था से जुड़े रिकार्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।

विजिलेंस जांच में अब यह देखा जा रहा है कि हिमकेयर योजना के संचालन के दौरान शीर्ष स्तर पर प्रशासनिक निगरानी किस तरह की गई थी। उपचार की दरें तय करने, निजी अस्पतालों को योजना में शामिल करने और उनके दावों के सत्यापन से संबंधित निर्णय किस स्तर पर लिए गए, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। साथ ही विभाग को मिली शिकायतों और ऑडिट आपत्तियों पर हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में लिया गया है।

आईजीएमसी के रिकॉर्ड और क्लेम की पड़ताल

जांच के दौरान विजिलेंस ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल  शिमला से संबंधित रिकॉर्ड खंगाले हैं। निजी अस्पतालों की ओर से हिमकेयर के तहत किए गए दावों और उनके समर्थन में लगाए गए दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि उपचार, क्लेम तैयार करने, उसके सत्यापन और भुगतान तक की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं।

71 निजी अस्पतालों के रिकॉर्ड जांच के दायरे में

इससे पहले जुलाई में सामने आई जांच रिपोर्ट में करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक संदिग्ध भुगतान के संकेतों का उल्लेख किया गया था और 71 निजी अस्पतालों के रिकॉर्ड जांच के दायरे में होने की बात सामने आई थी। इन अस्पतालों के दावों, मरीजों के उपचार, बिलिंग और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। रिपोर्ट में कुछ संस्थानों के न्यूनतम स्वास्थ्य मानकों को पूरा किए बिना संचालित होने तथा संदिग्ध बिलिंग से जुड़े तथ्य सामने आने का भी उल्लेख किया गया था।

तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव से किन बिंदुओं पर होंगे सवाल?

विजिलेंस की जांच का प्रशासनिक पक्ष अब इस बात पर केंद्रित है कि योजना के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले शीर्ष स्तर पर क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी। तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव से मुख्य रूप से नीतिगत मंजूरियों, योजना के संचालन और निजी अस्पतालों को पैनल में शामिल करने से जुड़े निर्णयों के बारे में जानकारी ली जा सकती है।

डॉ. जनक राज से हो चुकी पूछताछ

हिमकेयर मामले की जांच में आईजीएमसी के तत्कालीन वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक और वर्तमान भाजपा विधायक डॉ. जनक राज से भी विजिलेंस पूछताछ कर चुकी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनसे उनके कार्यकाल के दौरान हिमकेयर के तहत उपचार, क्लेम, निगरानी और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े सवाल पूछे गए थे। विजिलेंस अब केवल अस्पताल स्तर पर कथित अनियमितताओं की पड़ताल तक सीमित नहीं है। योजना के संचालन से जुड़े स्वास्थ्य निदेशालय, सचिवालय और आईजीएमसी के बीच हुए पत्राचार को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है। इसके अलावा उपचार दरों, अस्पतालों की सूची, क्लेम प्रक्रिया, भुगतान और ऑडिट से संबंधित फाइलों को व्यवस्थित तरीके से खंगाला जा रहा है।

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