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हिमाचल के दूरदराज क्षेत्र में भी जंक फूड की ओर रुझान, 337 छात्रों पर हुए अध्ययन में सामने आए चौंकाने वाले पहलू

By Shikha Verma Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 14 Oct 2026 06:32 AM (IST)

हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में भी जंक फूड का चलन बढ़ रहा है, जबकि यहां के लोग पारंपरिक पौष्टिक खानपान ...और पढ़ें

हिमाचल के दुर्गम क्षेत्रों में जंक फूड का रुझान बढ़ गया है। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल के दुर्गम क्षेत्रों में जंक फूड का रुझान बढ़ गया है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. जनजातीय क्षेत्रों में जंक फूड का चलन तेजी से बढ़ा।

  2. 43% किशोर सप्ताह में एक से अधिक बार जंक फूड खाते।

  3. साथियों का प्रभाव और स्क्रीन टाइम मुख्य कारण।

शिखा वर्मा, शिमला। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में भी जंक फूड का चलन बढ़ रहा है। जनजातीय क्षेत्रों के लोग अपने पारंपरिक, प्राकृतिक और पौष्टिक खान-पान की आदतों के लिए पहचान रखते हैं। आइजीएमसी अस्पताल शिमला के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की ओर से किए अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दुष्प्रभाव की जानकारी होने के बावजूद बच्चे स्वाद के लिए इसका सेवन कर रहे हैं। 

आइजीएमसी अस्पताल शिमला के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डा. डीएस डडवाल के साथ डा. तमन्ना, डा. अंजलि महाजन, डा. नरेंद्र महाजन और डा. प्रेम लाल चौहान के अध्ययन में सामने आया कि 43 प्रतिशत किशोर सप्ताह में एक से अधिक बार जंक फूड और अस्वास्थ्य खाद्य या पेय पदार्थों का सेवन करते हैं।

337 छात्रों पर अध्ययन

अध्ययन में नौवीं से जमा दो कक्षा तक के 337 विद्यार्थियों को शामिल किया गया। अध्ययन में चीनीयुक्त, कैफीन वाले और कार्बोनेटेड पेय पदार्थ किशोरों के बीच सबसे अधिक प्रचलित श्रेणी में रहे। 

क्या पाया गया प्रमुख कारक

अध्ययन में साथियों का प्रभाव जंक फूड के सेवन से जुड़ा प्रमुख कारक पाया गया। इसके अलावा मोबाइल या अन्य डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करते समय जंक फूड खाने का व्यवहार भी इसके सेवन से जुड़ा मिला। दोस्तों के साथ खाने और स्क्रीन देखते समय स्नैक्स लेने की आदत किशोरों के खानपान को प्रभावित कर सकती है।

पारंपरिक खानपान के बीच बदल रही पसंद

जनजातीय क्षेत्रों में पारंपरिक खाद्य पदार्थों का सांस्कृतिक महत्व अब भी बना हुआ है, लेकिन पैकेटबंद स्नैक्स और मीठे पेय पदार्थ भी किशोरों की खानपान की आदतों में जगह बना रहे हैं। स्कूलों में जंक फूड की उपलब्धता पर प्रतिबंध होने के कारण विद्यार्थियों को परिसर में ऐसे खाद्य पदार्थ आसानी से नहीं मिलते। इसके बावजूद स्वाद, दोस्तों का प्रभाव और डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल के दौरान खाने की आदत उनकी पसंद को प्रभावित कर सकती है।

पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने की जरूरत

अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि किशोरों को केवल जंक फूड के नुकसान बताना पर्याप्त नहीं है। पारंपरिक और पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने के साथ स्वादिष्ट और स्वस्थ विकल्प उपलब्ध कराना भी जरूरी है। स्कूलों में स्वस्थ खानपान का माहौल बनाने और मोबाइल देखते समय खाने की आदत के प्रति जागरूकता बढ़ाने से किशोरों को बेहतर खाद्य विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।"

 

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