हिमाचल प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों के अलग कैडर पर लगी रोक, स्वास्थ्य विभाग के सामने अब नई चुनौती
हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य निदेशालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए अलग कैडर बनाने की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है।

हिमाचल प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टर्स के अलग कैडर पर ब्रेक लग गई है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
विशेषज्ञ चिकित्सकों के अलग कैडर बनाने की प्रक्रिया रुकी।
बढ़ते पीजी डॉक्टरों की तैनाती बड़ी चुनौती बनी।
दो साल की फील्ड सेवा अनिवार्यता मुख्य कारण।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य निदेशालय के तहत विशेषज्ञ चिकित्सकों के अलग कैडर बनाने की प्रक्रिया फिलहाल रुक गई है। चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारियों का अलग कैडर बनाने की योजना प्रस्तावित थी। अभी तक सभी को चिकित्सा अधिकारी और वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी सेवाकाल के आधार पर दर्जा दिया जाता है।
वर्तमान में प्रदेश में 685 के करीब विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। इसके अलावा सरकार ने 150 और पद स्वीकृत किए हैं। जिनको भरे जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पीजी करने वालों की अधिक संख्या और दो साल की फील्ड की अनिवार्यता सेवा के कारण काफी अधिक संख्या में पीजी पूर्ण करके आने वालों को आखिर कैसे अलग कैडर में रखेंगे ये सबसे बड़ी समस्या आ रही है। हालांकि सरकार हर साल नए पदों को सृजित करने के अलावा भर रही है।
दो कैडर
प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के तहत सेवाएं प्रदान करने वाले चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को मुख्य रूप से दो कैडर जिसमें मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सा शिक्षा निदेशालय और दूसरे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय के अधीन बांटे गए हैं।
विभाग के सामने चुनौती
प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद भरे होने और लगातार पीजी करके नए विशेषज्ञ तैयार होने के बीच विभाग के सामने उनकी तैनाती की व्यवस्था तय करना चुनौती बना हुआ है। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सकों के 150 नए पद भी सृजित किए गए हैं। ऐसे में अलग कैडर बनाने से पहले मौजूदा व्यवस्था और भविष्य में आने वाले विशेषज्ञों की तैनाती का खाका तय करना जरूरी होगा। प्रदेश स्वास्थ्य निदेशालय के तहत चिकित्सा अधिकारियों का 2700 से अधिक का कैडर है और इसके अलावा चिकित्सा अधिकारी (विशेषज्ञ) दिया गया है।
हर साल तैयार हो रहे 280 के करीब विशेषज्ञ, अब होंगे 450
प्रदेश में हर साल 280 चिकित्सक पीजी कर विशेषज्ञ चिकित्सक बन रहे हैं। अब पीजी की सीटों को बढ़ाकर 450 कर दिया है। इनमें जीडीओ यानी पहले से सरकारी सेवारत चिकित्सक और सीधे पीजी करने वाले चिकित्सक हैं। पीजी करने के बाद दो वर्ष की फील्ड सेवा यानी अस्पतालों में सेवा प्रदान करना बॉन्ड में आवश्यक किया गया है। पीजी करने के बाद नए सिरे से तैनाती आदेश जारी होते हैं आखिर हर साल इतने पीजी बनने पर निर्धारित से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक कैसे लगेंगे ये सवाल है।
प्रदेश में चिकित्सकों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के आवश्यकता के आधार पर पदों को सृजित किया जा रहा है। उन्हें भरने की प्रक्रिया चल रही है। नई व्यवस्था को लेकर उसके प्रभावों को देखना आवश्यक है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत कैडर अलग किए गए हैं। जिसके सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं।
-कर्नल धनीराम शांडिल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, हिमाचल प्रदेश।
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