कोलतार की बढ़ती कीमतों से नहीं रुकेगी सड़क की टारिंग, केंद्र की मंजूरी के बाद हिमाचल को मिला विशेष बजट
कोलतार की बढ़ती कीमतों के कारण हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण सड़कों के निर्माण पर मंडरा रहा संकट टल गया है। केंद्र सरकार ने अतिरिक्त वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है।
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हिमाचल प्रदेश में सड़क टारिंग का कार्य प्रभावित नहीं होगा। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
केंद्र ने हिमाचल को कोलतार मूल्य वृद्धि पर राहत दी।
ग्रामीण सड़कों का निर्माण अब बिना रुकावट जारी रहेगा।
ठेकेदारों को बढ़ी लागत से होने वाले घाटे से मुक्ति।
राज्य ब्यूरो, शिमला। कोलतार की बढ़ती कीमतों से ग्रामीण सड़कों के निर्माण पर मंडरा रहा संकट फिलहाल टल गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत निर्माण और टारिंग कार्य जारी रहेंगे तथा बढ़ी लागत का बोझ ठेकेदारों और निर्माण कंपनियों पर नहीं पड़ेगा। प्रदेश सरकार के विशेष आग्रह पर केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्रालय ने अतिरिक्त वित्तीय राहत के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
चालू वित्त वर्ष में कोलतार के लिए 15 करोड़ रुपये का अग्रिम प्रविधान किया गया है, जबकि अगले छह वर्षों में इस मद में 96 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि खर्च होने का अनुमान है। सरकार ने इसके लिए वित्तीय व्यवस्था भी कर ली है।
ठेकेदारों ने जताई थी असमर्थता
कोलतार की कीमतों में लगातार दूसरी बड़ी बढ़ोतरी के बाद ठेकेदार संघ ने पुरानी दरों पर काम जारी रखने में असमर्थता जताते हुए लोक निर्माण विभाग को नोटिस दिए थे। इससे प्रदेश में ग्रामीण सड़कों की टारिंग ठप होने की आशंका पैदा हो गई थी। अब अतिरिक्त वित्तीय सहायता से ठेकेदारों को बढ़ी लागत के कारण घाटा उठाने से राहत मिलने और निर्माण कार्यों की गति व गुणवत्ता बनाए रखने की उम्मीद है।
डीपीआर बनी 40 रुपये के भाव पर, अब कीमत दोगुने से पार
पीएमजीएसवाई चरण-तीन और अन्य ग्रामीण सड़क परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करते समय बिटुमिन की कीमत करीब 40 से 43 रुपये प्रति किलोग्राम थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अस्थिरता के बीच पहले कीमतें बढ़कर 86 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक हो गईं। हालिया बढ़ोतरी के बाद प्रति किलोमीटर सड़क निर्माण लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक इजाफा दर्ज किया गया है। ऐसे में पुरानी दरों पर काम करना ठेकेदारों के लिए आर्थिक रूप से मुश्किल हो गया था।
सरकारी तेल कंपनियों की बेरुखी, निजी कंपनियों को मौका
कोलतार की महंगाई के साथ आपूर्ति व्यवस्था भी चुनौती बनी हुई है। लोक निर्माण विभाग और पीएमजीएसवाई ठेकेदारों के अनुसार, हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) और भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) सीधे कोलतार उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। आरोप है कि दोनों केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों का प्रबंधन विभाग के साथ समन्वय और सीधी आपूर्ति बहाल करने के मुद्दे पर अपेक्षित पहल नहीं कर रहा है।
इसका फायदा निजी कंपनियों और मध्यस्थों को मिल रहा है, जो खुले बाजार में ऊंची कीमतों पर तारकोल बेच रहे हैं। इससे ठेकेदारों की लागत और वित्तीय जोखिम बढ़ रहे हैं। प्रदेश सरकार की अतिरिक्त वित्तीय सहायता से निर्माण कार्यों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन सरकारी तेल कंपनियों से सीधी आपूर्ति बहाल करना भी जरूरी होगा, ताकि बढ़ी लागत के साथ-साथ आपूर्ति संबंधी अड़चनें दूर हों और ग्रामीण सड़क परियोजनाओं की रफ्तार बनी रहे।
