हिमाचल में छात्राओं के यौन उत्पीड़न पर 3 प्रोफेसर नौकरी से बर्खास्त, क्लास और लैब में किया अनुचित व्यवहार
हिमाचल प्रदेश में तीन असिस्टेंट प्रोफेसरों को छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोप में नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में छात्राओं से छेड़छाड़ पर तीन असिस्टेंट प्रोफेसर नौकरी से बर्खास्त कर दिए हैं। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
तीन असिस्टेंट प्रोफेसर यौन उत्पीड़न के आरोप में बर्खास्त।
शिमला और नादौन कॉलेजों में हुई थीं घटनाएं।
शिक्षा विभाग ने जांच के बाद की सख्त कार्रवाई।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में कॉलेज छात्राओं का यौन उत्पीड़न करने पर शिक्षा विभाग ने वीरवार को तीन असिस्टेंट प्रोफेसर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। तीनों ही मामले सरकारी कालेजों के हैं। छात्राओं की शिकायत के आधार पर शिक्षा विभाग ने मामले में जांच बिठाई थी। जांच में आरोप साबित होने के बाद सचिव शिक्षा राकेश कंवर ने इन्हें नौकरी से बर्खास्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
जिन शिक्षकों को बर्खास्त किया गया है उनमें पवन कुमार, अनिल कुमार और वीरेंद्र शर्मा शामिल हैं। घटना के वक्त सहायक आचार्य (कथक) पवन कुमार ललित कला महाविद्यालय चौड़ा मैदान शिमला, सहायक आचार्य (रसायन विज्ञान) अनिल कुमार राजकीय महाविद्यालय नादौन और सहायक आचार्य (गणित) वीरेंद्र शर्मा राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय चौड़ा मैदान शिमला में तैनात थे।
7 महीने तक करता रहा मानसिक व शारीरिक रूप से परेशान
23 जनवरी 2024 को जवाहर लाल नेहरू ललित कला महाविद्यालय शिमला के सहायक आचार्य (कथक) पवन कुमार पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। छात्रा ने 27 अगस्त 2024 को कॉलेज की आंतरिक शिकायत समिति को लिखित शिकायत दी। आरोप लगाया कि आरोपित शिक्षक पिछले सात महीनों से उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान कर रहा है। घटना वाले दिन उसे कथित तौर पर बहाने से न्यू शिमला स्थित अपने आवास पर ले जाया गया, यहां उसके साथ जबरन छेड़छाड़ की कोशिश की। घटना के बाद छात्रा गहरे मानसिक तनाव, असुरक्षा और भय के माहौल में रहने लगी, जिसका असर उसकी सेहत और पढ़ाई पर भी पड़ा। विभाग ने 31 अगस्त 2024 को पवन कुमार को निलंबित किया। अब आरोपित को बर्खास्त कर दिया है।
नादौन में लैब में किया अनुचित व्यवहार
14 नवंबर 2024 को हमीरपुर जिला के नादौन स्थित सिद्धार्थ राजकीय महाविद्यालय में छात्रा से यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया। बीएससी (नॉन-मेडिकल) की छात्रा केमिस्ट्री लैब में प्रैक्टिकल क्लास कर रही थी। छात्रा ने आरोप लगाया कि क्लास के दौरान प्रोफेसर डा. अनिल कुमार ने बार-बार उसे अनुचित तरीके से छुआ। शिकायत के अनुसार, वह उसके पीछे खड़े होकर आपत्तिजनक शारीरिक संपर्क बनाते रहे और छात्रा के हटने की कोशिश के बावजूद यह हरकत जारी रखी। घटना के तुरंत बाद छात्रा ने लिखित शिकायत कालेज प्रशासन को सौंपी। 21 नवंबर 2024 को कॉलेज प्राचार्य ने इसकी रिपोर्ट निदेशालय भेजी। 10 जनवरी 2025 को डा. अनिल कुमार को निलंबित किया अब उसे बर्खास्त कर दिया गया है।
जबरन आवास में ले जाकर संबंध बनाने की कोशिश की
यह मामला 1 दिसंबर 2021 का है। राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय, चौड़ा मैदान (शिमला) की बीएससी की छात्रा ने कालेज प्राचार्य को लिखित शिकायत दी थी। छात्रा ने आरोप लगाया था कि गणित विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. वीरेंद्र शर्मा पिछले करीब एक सप्ताह से उसे व्हाट्सएप पर निजी संदेश भेजकर परेशान कर रहे थे और बातचीत के लिए दबाव बना रहे थे। 1 दिसंबर को उसे सिसल होटल के पास मिलने के लिए बुलाया।
छात्रा जब वहां पहुंची, तो आरोपी उसे अपनी निजी कार में बैठाकर चक्कर स्थित अपने आवास पर ले गया। वहां उसने छात्रा के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की। छात्रा ने विरोध किया और किसी तरह वहां से निकलने में सफल रही। बाद में आरोपित ने उसे धमकी दी कि वह इस घटना के बारे में किसी को न बताए। 4 दिसंबर 2021 को पुलिस थाना बालूगंज में मामला दर्ज किया गया। 7 दिसंबर 2021 को आरोपित प्रोफेसर को निलंबित कर दिया गया। जिस अधिकारी को जांच सौंपी गई, वह बीच में सेवानिवृत हो गया। जिसके बाद नए सिरे से जांच बिठाई गई। अब आरोपित को बर्खास्त किया गया है।
सचिव ने आदेश में की सख्त टिप्पणी
शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने आदेश में कहा कि शिक्षक का पद केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह एक मार्गदर्शक, संरक्षक और नैतिक आदर्श भी होता है। ऐसे में किसी भी प्रकार का यौन उत्पीड़न, पद का दुरुपयोग और छात्राओं की सुरक्षा से खिलवाड़ अत्यंत गंभीर अपराध है। इस तरह के कृत्य शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाते हैं और समाज में गलत संदेश देते हैं। इसलिए दोषी को सेवा में बनाए रखना असंभव है।
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