विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हिमाचल में घर के कचरे पर नजर रखेंगे छात्र, बनेंगे ‘हाउसहोल्ड सुपरवाइजर’, ...तो कटेगा बिजली-पानी कनेक्शन

By Anil Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 23 Sep 2026 05:47 PM (IST)

हिमाचल में नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 लागू हो गए हैं, जिसके तहत छात्र 'हाउसहोल्ड सुपरवाइजर' बनकर घरों में कचरा पृथक्करण की निगरानी करेंगे।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव सुशील कुमार सिंगला पत्रकार वार्ता करते हुए। जागरण

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव सुशील कुमार सिंगला पत्रकार वार्ता करते हुए। जागरण

HighLights

  1. छात्र 'हाउसहोल्ड सुपरवाइजर' बनकर कचरा प्रबंधन की निगरानी करेंगे।

  2. नए नियमों के तहत कचरे का स्रोत पर पृथक्करण अनिवार्य होगा।

  3. नियमों का उल्लंघन करने पर बिजली-पानी कनेक्शन काटे जा सकते हैं।

राज्य ब्यूरो, शिमला। घर से निकलने वाला कचरा अब सिर्फ नगर निकायों की जिम्मेदारी नहीं रहेगा। हिमाचल में नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 लागू होने के साथ ही विद्यार्थियों को भी कचरा प्रबंधन की निगरानी और जागरूकता से जोड़ा जा रहा है। विद्यार्थी ‘हाउसहोल्ड सुपरवाइजर’ के रूप में अपने परिवारों को 100 प्रतिशत कचरा पृथक्करण के लिए प्रेरित करेंगे। 

वहीं, ऐसे ग्रामीण और शहरी क्षेत्र जहां पर्यटकों की आमद अधिक है, वहां स्थानीय निकाय कचरा प्रबंधन के लिए शुल्क लगा सकेंगे। नए नियमों के तहत कचरे का पृथक्करण और वैज्ञानिक प्रबंधन नहीं करने वाले बल्क वेस्ट जनरेटरों (बीडब्ल्यूजी) पर भी कार्रवाई की तैयारी है। 

बल्क वेस्ट जनरेटरों की पहचान होगी

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव सुशील कुमार सिंगला ने बुधवार को प्रेस वार्ता में कहा कि जिला उपायुक्त स्थानीय निकायों के साथ मिलकर छह सप्ताह के भीतर प्रदेशभर में बल्क वेस्ट जनरेटरों की पहचान करेंगे। इसके बाद संबंधित संस्थानों और प्रतिष्ठानों को लिखित नोटिस जारी किए जाएंगे। नियम शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ वाणिज्यिक, संस्थागत और सरकारी प्रतिष्ठानों पर भी लागू होंगे। नियमों की अवहेलना करने वालों की बिजली और पानी की आपूर्ति अस्थायी रूप से काटने की कार्रवाई भी की जा सकेगी।

घर से ही चार डिब्बों में अलग होगा कचरा

नए नियमों के तहत कचरे को स्रोत पर ही चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य किया गया है। घरों और प्रतिष्ठानों में गीला, सूखा, सेनेटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा अलग-अलग रखना होगा। सूखे कचरे में कागज, गत्ता, प्लास्टिक, कांच और धातु जैसी पुनर्चक्रण योग्य सामग्री शामिल होगी। विशेष देखभाल वाले कचरे में सीएफएल, फ्लोरोसेंट ट्यूब, एक्सपायर्ड दवाइयां, पेंट के डिब्बे, इस्तेमाल की गई सिरिंज, पारा थर्मामीटर और बैटरियां शामिल हैं। सेनेटरी कचरे को निर्माता या ब्रांड की ओर से उपलब्ध कराए गए पाउच अथवा रैपिंग सामग्री में सुरक्षित रूप से लपेटकर निर्धारित स्थान पर देना होगा।

कचरा जलाया तो भी होगी कार्रवाई

कचरे को जलाने, जमीन में दबाने, खुले में फेंकने तथा नालियों, जलस्रोतों और सार्वजनिक स्थानों पर डालने पर रोक रहेगी। सिंगला ने नागरिकों, स्कूलों, सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से नियमों का पालन करने की अपील की।

विद्यार्थियों को सौंपी जाएगी घर की निगरानी

कचरा पृथक्करण को घर-घर की आदत बनाने के लिए विद्यार्थियों को ‘हाउसहोल्ड सुपरवाइजर’ के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। स्कूल और उच्च शिक्षा विभाग पाठ्यक्रम में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के सैद्धांतिक और व्यावहारिक मॉड्यूल शामिल कर रहे हैं। विद्यार्थी अपने परिवारों को कचरे का 100 प्रतिशत पृथक्करण करने के लिए प्रेरित करेंगे। समय-समय पर होने वाले ऑडिट की रिपोर्ट उपायुक्तों को दी जाएगी। कचरा प्रसंस्करण सुविधाओं का प्रतिदिन विस्तृत ऑडिट किया जाएगा। इसमें स्रोत पर कचरा पृथक्करण, प्रसंस्करण, निपटान और कचरे के उपयोग की स्थिति जांची जाएगी। कचरे के अंतरराज्यीय आवागमन पर भी निगरानी रखी जाएगी। 

 

यह भी पढ़ें: हिमाचल में CBSE स्कूलों से हटेंगे 2 विषय, कंप्यूटर साइंस और IP दोनों रहेंगे; लेक्चरर की तैनाती के लिए कमेटी बदली