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हिमाचल में भवन निर्माण के लिए पंचायत से ऑनलाइन मिलेगी एनओसी, मनमानी पर लगेगी रोक, 7 प्वाइंट में समझें पूरी प्रक्रिया

By Jagran News Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 06 Jan 2026 11:51 AM (IST)

Himachal Pradesh Panchayat, हिमाचल प्रदेश के पंचायती राज विभाग ने पंचायतों में भवन निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में पंचायतों में भवन निर्माण के लिए ऑनलाइन एनओसी मिलेगी। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल प्रदेश में पंचायतों में भवन निर्माण के लिए ऑनलाइन एनओसी मिलेगी। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. एनओसी अब ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल से ऑनलाइन जारी होगी।

  2. मनमानी अस्वीकृति पर रोक लगेगी, पारदर्शिता बढ़ेगी।

  3. केवल तय कानूनी आधार पर ही एनओसी रुकेगी।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार के पंचायती राज विभाग ने पंचायतों के नगर एवं ग्राम नियोजन (टीसीपी) क्षेत्रों में भवन निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी करने व अस्वीकार करने पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह सेवा अब ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन की जाएगी। इसके साथ ही एनओसी को मनमाने ढंग से रोकने की गुंजाइश पर रोक लगेगी। 

इस संबंध में सचिव पंचायतीराज विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं। इसके तहत एनओसी का एक समान आवेदन फार्म, स्वीकृति और अस्वीकृति प्रारूप निर्धारित कर दिए गए हैं।

अब तक अलग-अलग पंचायतों में मैनुअल तरीके से एनओसी जारी होती थी। अब केवल तय कानूनी आधार पर ही एनओसी रोकी जा सकेगी। आवासीय भवन के लिए शुल्क 100 रुपये जीएसटी के साथ और गैर-आवासीय भवन के लिए 1000 रुपये शुल्क जीएसटी के साथ लिया जाएगा।

एनओसी अस्वीकृति का वैध आधार

  • यदि प्रस्तावित निर्माण पंचायत या सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण करता हो।
  • सड़क, रास्ता, पेयजल व सीवरेज पाइपलाइन, नाली, खेल मैदान या पंचायत द्वारा संधारित किसी ढांचे को नुकसान पहुंचाता हो, इन्हीं कारणों के अलावा किसी अन्य आधार पर एनओसी रोका नहीं जा सकेगा। 

ये रहेगी प्रक्रिया

  1. पंचायत सचिव राजस्व रिकार्ड से पंचायत व सार्वजनिक संपत्ति की जांच करेगा।
  2. आवश्यकता पड़ने पर मौके पर सत्यापना होगा।
  3. पंचायत बैठक में प्रस्ताव पारित किया जाएगा। 
  4. प्रस्ताव के आधार पर एनओसी जारी किया जाएगा।
  5. ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल अनिवार्य।
  6. सेवा सक्रिय होने के बाद मैनुअल एनओसी जारी नहीं की जाएगी।
  7. सभी आवेदन और प्रमाणपत्र आनलाइन होंगे।

क्यों है यह फैसला अहम

  • लोगों को पंचायत स्तर पर अनावश्यक परेशानियों से राहत।
  • भवन निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता।
  • पंचायतों की जवाबदेही तय व अतिक्रमण रोकने में मदद।

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